शहर में मिठाई की दुकानों के अलावा कई लोगों ने नमकीन बनाने का भी कारखाना लगा रखा है, जहां नमकीन को पांच व 10 किलो के पैकेट में तैयार कर दुकानों पर भेजा जाता है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस नमकीन को चटपटा और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें ब्रांडेड कंंपनियों की नमकीन भी मिलाई जाती है।
सस्ते के चक्कर में खुले में बिकने वाला नमकीन खा रहे हैं तो सावधानी बरतने की जरुरत है। मिलावटखोरों ने इसे भी नहीं बख्शा है। ब्रांडेड कंपनियों की बेकार (एक्सपायर) हो चुके नमकीन के पैकेट सस्ते में खरीदकर धंधेबाज अपने यहां बनने वाले लोकल नमकीन में मिला देते हैं और फिर इसे बिना रैपर वाले पैकेट में डालकर छोटी दुकानों पर सप्लाई कर देते हैं।
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इस तरह से तैयार नमकीन 150 से 180 रुपये किलो के भाव दुकानदार को मिल जाता है, जिसे वह 400 रुपये किलो के हिसाब से बेच देते हैं। इस तरह से बिकने वाला नमकीन पर न तो निर्माता का नाम पता होता है और न ही इस पर उत्पादन या एक्सपायरी डेट होती है, जिससे दुकानदार इसे जब तक चाहे बेच सकते हैं।
मिठाई की तरह ही नमकीन भी हर घर की जरूरत है। खुद के अलावा मेहमानवाजी में भी इसका उपयोग होता है। डिमांड की वजह से यह धंधेबाजों की नजर में है। शहर में मिठाई की दुकानों के अलावा कई लोगों ने नमकीन बनाने का भी कारखाना लगा रखा है, जहां नमकीन को पांच व 10 किलो के पैकेट में तैयार कर दुकानों पर भेजा जाता है।
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बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस नमकीन को चटपटा और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें ब्रांडेड कंंपनियों की नमकीन भी मिलाई जाती है। चूंकि वह नमकीन महंगा होता है, लिहाजा धंधेबाज अच्छी क्वालिटी वाली कंपनी के नमकीन का एक्सपायर माल खरीदते हैं।
आमतौर पर जिस महीने कंपनी वाले नमकीन की एक्सपायरी डेट होती है, उस महीने उसे आधी से कम कीमत पर ही थोक विक्रेता बेचकर अपना गोदाम खाली कर लेते हैं। धंधेबाज इसे खरीदकर अपने गोदाम में पड़े लोकल नमकीन में मिलाकर बिना स्टीकर वाले पैकेट में डाल देते हैं।