यह आपको सावधान करने वाली खबर है। धंधेबाज काली कमाई के लिए आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर के लोग अनजाने में रोजाना, सेहत के लिए हानिकारक 60 क्विंटल खेसारी और बटरी की दाल खा जाते हैं। दाल के धंधेबाज 2000 क्विंटल अरहर की दाल में इसे मिलाकर बेच देते हैं।
एक ट्रक दाल में धंधेबाज करीब दो लाख रुपये की काली कमाई कर लेते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में डेढ़ साल में दाल के 75 नमूनों में 20 फेल हो गए। ये आंकड़े मिलावट की तस्दीक करते हैं। थोक मंडी के व्यापारियों के अनुसार, गोरखपुर में हर दिन 12-15 ट्रक दाल की खपत होती है, जिसमें 6-7 से ट्रक अरहर दाल होती है।
4 से 5 ट्रक दाल में मिलावट होने का अनुमान है। एक ट्रक में 30 टन दाल आता है, जिसमें 15 क्विंटल खेसारी या बटरी दाल मिलाने पर आसानी से पता नहीं चलता है। इस प्रकार एक दिन में 2000 टन से अधिक अरहर दाल बिक जाती है, जिसमें 60-70 क्विंटल खेसारी दाल खपा दी जाती है।
यही नहीं, धंधेबाज बिहार के बिल पर मंडी शुल्क की चोरी भी करते हैं। एक ट्रक में ही तस्करी और मिलावट से दो लाख रुपये से अधिक का मुनाफा ये धंधेबाज कमा लेते हैं।
मिलावट और कर चोरी से दोहरी कमाई
मंडी में जो व्यापारी नियम-कायदे से कारोबार करते हैं, वे मिलावट और मंडी शुल्क की चोरी करने वालों से परेशान हैं। इसका असर उनके धंधे पर भी पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार, बिहार में मंडी शुल्क नहीं लगता है, जबकि उत्तर प्रदेश में डेढ़ प्रतिशत मंडी शुल्क है।
बिहार की फर्म के नाम पर बिल बनाने पर मंडी शुल्क बचता है। इसमें एक ट्रक दाल पार हो गई तो 60 से 67 हजार रुपये का फायदा होता है। बाजार में खेसारी दाल चोरी चुपके से बेची जा रही है, जिसकी कीमत 60 से 70 रुपये किलो है, जबकि अरहर दाल की कीमत 164 रुपये किलो है।
इस प्रकार खेसारी दाल जितना किलो खपा दिया जाता है, उतने प्रति किलो 100 रुपये की काली कमाई होती है। दाल महंगी है, इस कारण मिलावट होने पर एक ट्रक में ही करीब डेढ़ लाख काली कमाई हो जाती है।
इस प्रकार एक ट्रक दाल में दो लाख रुपये से अधिक काली कमाई हो जा रही है, जबकि दाल के धंधे में हर दिन 10 लाख रुपये से अधिक की काली कमाई होती है, जिसमें स्थानीय स्तर पर मिलावटी माल खपाने वाले धंधेबाज को दो हजार रुपये क्विंटल फायदा होता है। इस खेल में दाल मिलर्स और इसमें संलिप्त व्यापारियों के बीच तगड़ा नेटवर्क है।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से दाल आती है, जो गोरखपुर मंडी सहित आसपास की मंडियों व बाजारों में उतरती है। जिसमें इस दाल को खपाने वाले व्यापारी को दो हजार रुपये क्विंटल मिलता है। यहीं कारण है कि छत्तीसगढ़ दाल उद्योग संघ से मिलावट का विरोध किया तो शुद्ध दाल का कारोबार करने वाले व्यापारी खुश हैं।
छापे में मिले 150 करोड़ रुपये नकद
दाल में मिलावट और तस्करी से मोटी कमाई हो रही है। मध्य प्रदेश के कटनी में आयकर विभाग की टीम ने दाल कारोबारी के ठिकानों पर छापा मारा तो 150 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। व्यापारियों के अनुसार गोरखपुर अंचल, प्रयागराज व आसपास के जिलों में कटनी व छत्तीसगढ़ वाली दाल की खपत अधिक है।
बिहार के नाम पर दाल का धंधा करने वाले व्यापारी भी गोरखपुर के बैंकों में रुपये जमा कर रहे हैं। इनके बैंक खातों की जांच हो जाए तो यहां भी बड़ा खुलासा होगा।
डेढ़ साल में लिए 75 नमूने, 20 हुए फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में भी दाल में मिलावट की पुष्टि होती रही है, लेकिन मुनाफा इतना अधिक है कि धंधेबाजों का धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा। जिले में डेढ़ साल में दाल के 75 नमूने लिए गए हैं, जिसमें 20 फेल हो गए। इनमें 15 नमूने अधोमानक बताए गए हैं, जिसमें मिलावट की गई है।
इन नमूनों में दाल का आकार एक बराबर नहीं था। इसी प्रकार पांच नमूने असुरक्षित थे, जो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा हानिकारक बताए गए हैं। इसमें पॉलिश के दौरान अखाद्य रंग या कीड़े हो सकते हैं। वर्ष 2022-23 में दाल के 38 नमूने लिए गए थे, जिसमें छह की रिपोर्ट अधोमानक आई है, जबकि तीन नमूने असुरक्षित थे। वर्ष 2023-24 में अब 37 नमूने लिए गए हैं, जिसमें नौ की रिपोर्ट अधोमानक और दो की रिपोर्ट असुरक्षित थी।
सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त कुमार गुंजन ने बताया कि दाल की नियमित जांच की जाती है और नमूने फेल होने पर कार्रवाई की जाती है। निर्वाचन संबंधी कार्यों के बावजूद दाल के नमूने लिए जाएंगे, जो मिलावट करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।