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Gorakhpur News: कुत्ता-फॉलोअप

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सतर्क रहें..हर महीने 3500 लोगों को कुत्ते बना रहे शिकार
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जिला अस्पताल में हर दिन आ रहे 200-250 डाॅग बाइट के केस
भूखे-प्यासे कुत्ते बना रहे लोगों को निशाना, घर आते-जाते कर रहे हमला



अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गली के कुत्ते खतरनाक हो गए हैं। आंकड़े ही इसकी गवाही दे रहे हैं। जिला अस्पताल में हर महीने करीब 5,000 एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। इसमें से लगभग 3500 नए मामले हैं। भीड़ को संभालने के लिए जिला अस्पताल को अलग से प्रबंध करना पड़ रहा है। कुत्ते हर उम्र के लोगों को निशाना बना रहे हैं। पशु विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन-पानी के अभाव में कुत्ते हमलावर हो रहे हैं।
बसंतपुर के शिव वर्मा बाइक से घर जा रहे थे, इसी दौरान कुत्ते ने दौड़ा लिया। जब तक बाइक रोक कर उसे भगाते, वहां कई कुत्ते जुट गए। आसपास के लोगों ने खदेड़ा तब तक एक कुत्ते ने पैर में काट लिया। हांसूपुर के राहुल को भी कुत्ते ने दौड़ाकर काट लिया। ऐसे कई पीड़ित रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से लाइन लगाने वालों में से हर एक की अलग कहानी है। लेकिन, एक बात तो जो सभी में समान है, वह यह कि गली-मोहल्ले में घुसते ही कुत्ते, बाइक व कार के पीछे भौंकते हुए दौड़ने लगते हैं। जब तक आदमी संभलता है, इनके हमले का शिकार हो जाता है।
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जिला अस्पताल में सुबह से लगती है लाइन
एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल में हर दिन लंबी कतार लगती है। भीड़ से बचने के लिए लोग सुबह आठ बजे ही पहुंच जाते हैं। ओपीडी की पर्ची लेकर लाइन में लगे लोगों को पहले डॉक्टर से अपना परीक्षण कराना होता है। एक महिला डॉक्टर इनके पर्चे पर घाव की स्थिति देखकर इंजेक्शन का सुझाव लिखती हैं। इसके बाद दूसरे कमरे में वैक्सीन लगती है। डॉक्टर के कमरे में घुसने के लिए धक्का-मुक्की से लेकर वैक्सीन लगवाने तक भीड़ के चलते यहां लोगों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दोपहर 12 बजे तक वैक्सीन नहीं लगी तो फिर इस बात का तनाव रहता है कि कहीं आज वापस न लौटा दें।
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भोजन-पानी के अभाव में हमलावर होते हैं जानवर
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय हिसार के सेवानिवृत पशु चिकित्सक प्रो. सतीश कालरा बताते हैं कि जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन के लिए मौसम और भोजन-पानी प्रमुख कारण होता है। ग्रामीण इलाकों में पहले लोग छुट्टा जानवरों व पक्षियों के लिए भी दाना-पानी बाहर रखते थे। शहरी क्षेत्र में यह चलन कम रहा, लेकिन जगह-जगह जमा कूड़े के ढेर से जानवर अपने लिए भोजन की तलाश करते थे। गली-मुहल्लों में कोई कुत्ते, बिल्ली के लिए भोजन-पानी नहीं डालता। भूखे कुत्ते लोगों के पीछे भोजन के लिए दौड़ते हैं। जब उन्हें खाने को नहीं मिलता तो आक्रामक हो जाते हैं।
लोग बोले
एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने मैं पहले खलीलाबाद जिला अस्पताल गया था। वहां डॉक्टर ने बताया कि वैक्सीन खत्म हो गई है तो यहां आया। यहां सुबह से ही लंबी कतार लगी है, लेकिन वैक्सीन लगवाना भी जरूरी है। मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि हजार रुपये खर्च कर प्राइवेट में यह वैक्सीन लगवा सकूं।
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आयुष-खलीलाबाद
ग्रामीण इलाके के अस्पतालों में इंजेक्शन नहीं लगाते। मैंने पता किया तो बताया गया कि पांच लोग जब रहेंगे, तभी इंजेक्शन लग पाएगा, नहीं तो वापस लौटना होगा। इसलिए पीएचसी पर जाने के बजाय सीधे जिला अस्पताल ही आ गया। यहां लाइन में लगे हैं, उम्मीद है कि समय से इंजेक्शन लग जाएगा।
आलोक यादव-बड़गो
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