- विधि-विधान से होगी विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना
- राप्ती नदी में श्रद्धालु लाएंगे आस्था की डुबकी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बसंत पंचमी का पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। श्रद्धालु इस दिन ज्ञान, विद्या व कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आस्था निवेदित करेंगे। इस अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कई जगहों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं हैं।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन माघ शुक्ल पंचमी तिथि का मान शाम पांच बजकर 40 मिनट तक है। इस दिन रेवती नक्षत्र शाम चार बजे तक रहेगा। इसके बाद अश्विनी नक्षत्र रहेगा। शुभ योग भी संपूर्ण दिन से लेकर रात को एक बजकर आठ मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग लगेगा। शुभ और शुक्ल योग होने से इस दिन पूजन-अर्चन से श्रद्धालुओं को मां सरस्वती से विशेष कृपा मिलेगी।
बसंत पंचमी का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन अज्ञानता के अंधकार को खत्म करने के लिए ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। विशेष तौर पर इस दिन विद्यार्थी मां सरस्वती की आराधना कर विद्या का आशीर्वाद मांगते हैं। बसंत पंचमी के दिन विशेषकर पीले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है। यह रंग ऊर्जा और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है।
ऐसे करें बसंत पंचमी की पूजा
पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, इस दिन प्रात: काल स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने कलश स्थापित करें। इसके बाद माता सरस्वती और भगवान गणेश व नवग्रह की विधि-विधान से पूजा करें। प्रसाद के रूप में खीर या दूध से बनी मिठाइयां चढ़ाएं। इसके बाद श्वेत फूल माता को अर्पण करें। विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर जरूरतमंद बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें। संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगाकर मां की आराधना करें।