गोरखपुर। पांच दिसंबर के बाद मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। वहीं 16 दिसंबर से खरमास की शुरूआत होगी। अब एक फरवरी से विवाह मुहूर्त की शुरूआत होगी।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी के अनुसार खरमास 16 दिसंबर से लग रहा है, लेकिन इसके पहले 11 दिसंबर को शुुक्र अस्त हो रहे हैं। इसके तीन दिन पहले आठ दिसंबर से ही शुुक्र के अस्त होने से वृद्धत्व दोष के कारण मांगलिक कार्य नहीं होंगे। साथ ही पांच दिसंबर से आठ दिसंबर तक विवाह नक्षत्र नहीं मिलने से पांच दिसंबर के बाद से ही शादी-विवाह पर विराम लग जाएगा। वहीं गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि वृद्धत्व दोष में शादियां नहीं होती हैं। शुक्र अगले वर्ष खरमास के समापन के बाद एक फरवरी को उदय होंगे। इस कारण एक फरवरी के बाद ही मांगलिक कार्य एक बार फिर शुरु हो जाएंगे। लोग अपने पुत्र व पुत्रियों की शादी-विवाह कर सकेंगे। उनका कहना था कि इस महीने में प्रतिदिन सूर्य की पूजा करनी चाहिए और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं सूर्य मंत्र का जप करना बहुत शुभ माना जाता है। इस महीने में लक्ष्मी नारायण स्त्रोत्र का पाठ या विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें। खरमास में निर्धनों को दान और सहायता करने से देवगण प्रसन्न होते हैं, पूजा-अर्चना से देवता प्रसन्न होते हैं,ऐसी शास्त्रीय मान्यता है।