पंचांगं के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है.
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महाशिवरात्रि का त्योहार और महाकुंभ का शुभ संयोग बन रहा है। इसमें स्नान-दान और भगवान शिव की आराधना का विशेष फल मिलने के साथ श्रद्धालुओं के पापों का नाश भी होगा। हालांकि विवाह के नक्षत्रों के अनुकूल न होने के कारण इस दिन मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के साहित्य विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित कुमार मिश्र ने बताया कि 26 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। व्रत रखने वाले लोगों को भगवान शिव-पार्वती की आराधना करने से विशेष कृपा मिलती है।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने के साथ भगवान शिव को आक के पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, घी, गंगा जल अर्पण करने से श्रद्धालुओं का भाग्योदय होता है। शिव विवाह का आयोजन भी इस दिन धूमधाम से होगा।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिव चालिसा पाठ, रात्री जागरण कर भजन कीर्तन से भी भगवान की कृपा बरसती है। इस दिन कुंवारी माता पार्वती को शृंगार सामग्री अर्पण करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए माता को शृंगार का सामान चढ़ाती हैं।