गोरखपुर। शहर की सड़कों पर नजर आने वाली छुट्टा पशुओं की समस्या जल्द ही बीती बात हो जाएगी। कान्हां उपवन की तर्ज पर ताल नादौर में कान्हा गो आश्रय स्थल का निर्माण कराया जाएगा। 50 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाले जिले के सबसे बड़े गो आश्रय स्थल में पांच हजार से आठ हजार पशुओं को रखा जा सकेगा। इसके बगल में ही पशु चिकित्सा महाविद्यालय का भी निर्माण भी कराया जा रहा है।
जिले में वर्तमान में 38 पशु आश्रय स्थलों में 4041 पशुओं को रखा गया है। इसके बाद भी समस्या गंभीर बनी हुई है। शहर में सड़कों पर और गांव के खेतों में घूमने वाले छुट्टा पशु किसानों से लेकर राहगीरों तक के लिए समस्या बने हुए हैं। ये आए दिन दुर्घटना का कारण भी बनते हैं। ऐसे में समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने ताल नादौर में 50 एकड़ भूमि का आवंटन किया है। जिससे अधिक से अधिक पशुओं को यहां पर रखा जा सके। पशुपालन विभाग का मानना है कि इस गो आश्रय स्थल के बनने के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
80 एकड़ में बन रहा पशु चिकित्सा महाविद्यालय
ताल नादौर में ही 80 एकड़ क्षेत्रफल में पशु चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। पास ही चिकित्सा महाविद्यालय होने से आश्रय स्थल के पशुओं को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा मिल सकेगी। उधर, चिकित्सा महाविद्यालय में यदि पशुओं पर रिसर्च करना होगा तो उन्हें भी कहीं अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा।
कान्हां उपवन की तर्ज पर कान्हा गो आश्रय स्थल का निर्माण ताल नदौर में कराया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से 50 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है। यहां पर 5 से लेकर 8 हजार पशु रखे जा सकेंगे। इसके बन जाने से छु्ट्टा पशुओं की समस्या का समाधान हो
जाएगा। : जीके सिंह मुख्य पशु चिकित्साधिकारी