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जगदीशपुर-जंगल कौड़ियां रिंग रोड मामला: किसान खेती से गए और फिलहाल तो मुआवजे से भी

Mon, 19 Jun 2023 03:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
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जगदीशपुर जंगल कौड़ियां रिंग रोड की खबर में: अपने खेत में लगे पिलर को दिखाते किसान राम भजन। - फोटो : अमर उजाला।
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जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग रोड के निर्माण कार्य के लिए 26 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। लेकिन, मुआवजे का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इससे किसान असमंजस में हैं कि वे अपनी जमीन पर आने वाली फसल (धान) की खेती करें या फिर सड़क बनने का इंतजार। किसानों का मानना है कि वे न तो खेती करने लायक रह गए और न ही मुआवजा अब तक मिल सका है।

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बिना भुगतान हुए किसान यह मानने को तैयार नहीं है कि उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि जितनी भूमि पर पिलर लगाकर चिह्नत किया गया है, उस पर निर्माण कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया चल रही है। अब वहां कोई खेती नहीं हो सकती है।

जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का निर्माण करीब 1925 करोड़ की लागत से होगा। इसके लिए 26 गांव के किसानों की 154 हेक्टेयर जमीन का सर्वे करके भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तरफ से पिलर भी लगवाया गया है। मई माह में भूमि का मुआवजा देने के लिए सहमति पत्र पर दस्तखत लेने की प्रक्रिया शुरू हुई तो किसानों ने कम मुआवजा की बात पर विरोध जताया।
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कई गांवों में विरोध होने पर एसएलओ (भूमि अध्याप्ति अधिकारी), एनएचएआई और राजस्व की टीम मौके से लौट आई। इसके बाद से मुआवजे का पेंच फंसा हुआ है। रिंग रोड के लिए चिह्नित अधिकांश भूमि में किसान खेती करते हैं। अब धान की रोपाई का समय आ रहा है।


 

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इन गांवों से गुजरेगा रिंग रोड

मानीराम, ताल जहदा, रहमतनगर, बालापार, बैजनाथपुर, नरायणपुर टोला, बनगाई, परसिया, रसूलपुर, सोनराइच, बूढ़ाडीह, बनकटी उर्फ इटहिया, बेलवा रायपुर, जंगल औराही, जंगल अहमद अली शाह तुर्रा, महमूदाबाद मुगलपुरा, बनकटिया खुर्द मौलाखोर, कैथवलिया, करमहा, नैयापार खुर्द, रमवापुर, मठिया, सिहोरिया और कोनी।

मझधार में फंसे हैं
मेरी 19 डिस्मिल जमीन रिंग रोड में है। अन्य कई किसानों की भूमि भी है। किसी को मुआवजा मिला नहीं है। हम लोग मझधार में फंसे हैं कि अपनी खेती करें या ना करें। पैसा मिल जाता तो मामला स्पष्ट हो जाता। फिलहाल प्रशासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। -सुमित कुमार साहनी, प्रधान, सराय गुलरिहा।

सीधे संवाद से बच रहा प्रशासन
जिला प्रशासन किसानों से सीधे संवाद करने से बच रहा है। शिविर लगाने का समय निर्धारित कर समय से कोई जिम्मेदार अधिकारी गांव नहीं आया। कई तरह की चर्चा कर किसानों को गुमराह कर खेतों का अधिग्रहण करना चाहते है। हम अपनी भूमि में खेती करें या ना करें। यह सोचकर परेशान हैं। - रामाज्ञा राजभर, पूर्व प्रधान, महमूदाबाद उर्फ मोगलपुरा।

मामले का जल्द से जल्द हो निस्तारण
किसी विभाग के अधिकारी किसानों से बात करने नहीं आ रहे हैं। किस रेट पर मुआवजा दिया जाएगा, इसको लेकर किसान भ्रमित हैं। कुछ किसानों का पूरा खेत रिंंग रोड में है। वे खेती पर ही निर्भर हैं। इस मामले का जल्द से जल्द निस्तारण कराया जाना चाहिए। वरना किसान परेशान रहेंगे -गजेंद्र चौरसिया, प्रधान

काम शुरू कराना है तो मुआवजा दें
मेरे खेत से ही रिंग रोड गुजरा है। एनएचएआई ने पिलर लगा दिया है। अभी तक खेत खाली पड़ा हुआ है। यदि काम शुरू कराना है, तो इसका मुआवजा दिया जाए, जिससे खेती को लेकर कोई असमंजस की स्थित न रहे। यदि हम लोग फसल बो दें तो बाद में उसे रौंदने का रिस्क बना हुआ है। - रामभजन, किसान

अधिग्रहित भूमि पर खेती नहीं कर सकते किसान
जगदीशपुर-जंगल कौड़िया रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहित कर ली गई है। इस भूमि पर खेती नहीं की जा सकती है। इसके निर्माण के संबंध में प्रक्रिया जारी है। - भवेश अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
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