अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई के लिए डीएम दफ्तर में प्रपत्रों की जांच की गई। पांच बॉन्ड भरे गए। सभी 25 लाख रुपये मुचलके के हैं। इनमें अमनमणि त्रिपाठी, छोटी बहन अलंकृता त्रिपाठी, चचेरा भाई अनंत मणि त्रिपाठी, कृष्ण चंद्र त्रिपाठी और चाचा अजीत मणि त्रिपाठी के नाम के बॉन्ड डीएम दफ्तर में जमा किए गए। आरटीओ अधिकारी डीएम दफ्तर पर ही वैरिफिकेशन करवा गया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिहाई का आदेश जारी हुआ।
बता दें कि कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने के बाद से अमरमणि और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। रिहाई की खबर आने के बाद से उनके आज पूरे दिन समर्थकों में खुशी की लहर देखने को मिली।
ये था पूरा मामला
लखनऊ के निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में 9 मई 2003 को कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हुई हत्या से तत्कालीन बसपा सरकार में हड़कंप मच गया था। चंद मिनटों में मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को मधुमिता और अमरमणि के प्रेम प्रसंग के बारे में नौकर देशराज ने जानकारी दी, तो तत्काल शासन के अधिकारियों को सूचित किया गया। दरअसल अमरमणि बसपा सरकार के कद्दावर मंत्रियों में शुमार थे। मामले में सजा होने के बाद भी यूपी के सियासी गलियारों में अमरमणि की हनक कम नहीं हुई।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी थी। मधुमिता के शव को पोस्टमार्टम के बाद गृह जनपद लखीमपुर भेजा गया। अचानक एक पुलिस अधिकारी की नजर रिपोर्ट पर लिखी एक टिप्पणी पर पड़ी, जिसने इस मामले की जांच की दिशा बदल दी। दरअसल, रिपोर्ट में मधुमिता के गर्भवती होने का जिक्र था। तत्काल शव को रास्ते से वापस मंगवाकर दोबारा परीक्षण कराया गया। डीएनए जांच में सामने आया कि यह बच्चा अमरमणि का था।
बाद में बसपा सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराई। सीबीआई जांच के दौरान गवाहों को धमकाने के आरोप लगे तो मुकदमा देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया। कोर्ट ने मामले में 24 अक्तूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, भतीजा रोहित चतुर्वेदी और शूटर संतोष राय को उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि एक अन्य शूटर प्रकाश पांडेय को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालांकि बाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रकाश पांडेय को भी दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।