गोरखपुर। महानगर के होटल, नर्सिंग होम, पैथोलाजी और क्लीनिक को भी अब लाइसेंस शुल्क देना होगा। नगर निगम की ओर से इन दुकानों का डाटा बैंक तैयार हो रहा है। इनकी सूची और अन्य विवरण अभी नगर निगम के पास नहीं हैं। निरीक्षक लाइसेंस शुल्क का निर्धारण अपने हिसाब से करते हैं।
इन प्रतिष्ठानों से वर्ष में एक बार शुल्क जमा कराया जाता है। सभी दुकानों के लाइसेंस शुल्क के दायरे में आने से नगर निगम की आय में वृद्धि होनी तय है। महानगर में नगर निगम ने तकरीबन दो हजार दुकानें बनवाई हैं। इन दुकानदारों से नगर निगम किराया लेता है। ऐसी स्थिति में इनसे लाइसेंस शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा सभी दुकानदारों से लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा। सबसे ज्यादा लाइसेंस शुल्क शराब की दुकानों से जमा कराया जाता है। अंग्रेजी शराब की दुकान का लाइसेंस शुल्क 10 हजार रुपये और देसी शराब की दुकान का आठ हजार रुपये सालाना है। नाई की दुकान का भी लाइसेंस शुल्क निर्धारित है। घरों में संचालित दुकानों का भी ब्योरा तैयार किया जाएगा। इन मकानों से पहले की तरह गृह, जल व सीवर कर तो जमा कराया ही जाएगा, दुकानों का लाइसेंस शुल्क भी जमा कराया जाएगा। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि शहर में सभी दुकानों को निगम की सूची में शामिल किया जाएगा।