- कार्यकारी निदेशक के पुत्र के पीजी में प्रवेश लेने और फिर रिजाइन करने का मामला
- डॉ. गौरव गुप्ता ने ईडी पर कम आय दर्शा कर पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र बनवाने का लगाया है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। एम्स के कार्यकारी निदेशक पर लगे आरोपाें की जांच से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स के डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी। वहीं कार्यकारी निदेशक के पुत्र के रिजाइन करने से रिक्त हुई सीट पर अब कोई नामांकन नहीं होगा। नवंबर में फिर परीक्षा से इस सीट पर नए अभ्यर्थी का चयन होगा। उधर, कार्यकारी निदेशक ने भी पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया है।
एम्स के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग में पीजी की रिक्त सीट पर एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पॉल के पुत्र औरव पॉल ने दाखिला लिया था। 31 अगस्त को नामांकन हुआ और तीन सितंबर को औरव पॉल ने व्यक्तिगत कारणाें से रिजाइन कर दी। अगले दिन यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब डॉ. गौरव गुप्ता ने कार्यकारी निदेशक पर बेटे का दाखिला आठ लाख से कम आय वाले ओबीसी कैटेगरी के कंडीडेट के लिए आरक्षित सीट पर गलत ओबीसी सर्टिफिकेट के आधार पर करा लेने का आरोप लगा।
मामला मीडिया में आने के बाद प्रकरण सोशल मीडिया में छा गया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। मामला शासन स्तर पर पहुंचा और प्रकरण पर रिपोर्ट डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन से मांगी गई। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर अब अगली कार्रवाई शुरू होगी।
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सीट छोड़ने पर निदेशक को भरना पड़ा तीन लाख रुपये जुर्माना
एम्स में पीजी सीटों पर नामांकन के लिए काउंसिलिंग पहले चार चरण में एम्स दिल्ली में होती है। ओपन काउंसिलिंग के बाद भी जो सीटें रिक्त रह जाती हैं, उन्हें स्थानीय स्तर पर साक्षात्कार के आधार पर भरा जाता है। गोरखपुर एम्स में भी माइक्रोबॉयोलॉजी की जिस सीट पर कार्यकारी निदेशक के पुत्र ने नामांकन लिया था, वह ऐसी ही थी। चार काउंसिलिंग में भी नहीं भरी सीट पर निदेशक ने अपने बेटे को प्रवेश दिला दिया, लेकिन बेटे ने तीन दिन बाद ही सीट छोड़ दी। एम्स के नियमों के अनुसार सीट पर नामांकन के बाद छोड़ने पर तीन लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ता है। कार्यकारी निदेशक ने इसके लिए तीन लाख रुपये जमा भी कर दिए हैं।
अब नवंबर में परीक्षा से भरेगी यह सीट
पीजी सीट पर नामांकन के लिए किसी भी प्रकार की काउंसिलिंग या दाखिले के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त थी। इसके बाद जो भी सीटें बची रह गईं, उन पर नामांकन अब नवंबर में होने वाली अगली प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। एम्स गोरखपुर में भी माइक्रोबॉयोलाजी की इस रिक्त हुई सीट को इसी श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। अब इस पर नया एडमिशन नवंबर में होने वाली प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही होगा।
डायरेक्टर ने शासन को भेजा अपना जवाब
डॉ. गौरव गुप्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों पर एम्स के कार्यकारी निदेशक ने अपना पक्ष स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया है। दो दिन पहले ही उन्होंने डॉ. गौरव की तरफ से लगाए गए आरोपों की बिंदुवार रिपोर्ट भेजी है। इसमें कार्यकारी निदेशक ने बताया कि उनकी आय 43 लाख रुपये वार्षिक है, और इसी आधार पर उन्होंने बेटे का प्रमाणपत्र बनवाया है। प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया समेत अन्य सवालों के जवाब भी दिए हैं।
बेटे ने स्वेच्छा से सीट छोड़ी है, जिसके कारण हमने तीन लाख रुपये जुर्माना भी भरा है। मुझ पर जो भी आरोप लगाए गए हैं, उनका जवाब मैंने शासन को भेज दिया है। कोई तथ्य किसी से छिपाया नहीं है। मीडिया के सामने भी अपना पूरा प्रकरण रखा है।
-डॉ. जीके पॉल, कार्यकारी निदेशक, एम्स
जो आरोप कार्यकारी निदेशक पर लगे हैं, उससे संबंधित जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन से मांगी है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होनी है। पूरा प्रकरण संज्ञान में है।
-देश दीपक वर्मा, प्रेसिडेंट, एम्स