गोरखपुर के एम्स में इलाज के लिए ऑनलाइन बुकिंग करने वालों की संख्या हर दिन एक हजार से ज्यादा होती है, लेकिन ओपीडी में 700 से 800 मरीज ही आ रहे हैं। ऑनलाइन वालों के बाद ऑफलाइन मरीजों की बारी आती है।
कई बार ऑफ लाइन मरीजों की बारी आने तक डॉक्टरों के जाने का समय हो जाता है। इनके चक्कर में ऑफलाइन पर्ची कटाने वाले परेशान होते हैं। वहीं, डॉक्टर और सपोर्टिंग स्टॉफ के व्यवहार से मरीज दुखी हैं।
एम्स की ओपीडी में अब हर दिन ढाई हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें से 1200 से 1300 मरीज ऑनलाइन पर्ची कटाने वाले होते हैं। इन मरीजों को अपनी सुविधा के अनुसार समय बुक करने का भी अवसर मिलता है। वहीं ऑफलाइन पर्ची कटवाने वालों को इस काउंटर से उस काउंटर तक धक्के खाने होते हैं।
मंगलवार को स्त्री एवं प्रसुति रोग विभाग के सामने ऐसे कई मरीज भटक रहे थे, जिन्होंने ऑफलाइन पर्ची कटवाई थी, लेकिन नंबर ऑनलाइन वालों के बाद था और ऑनलाइन वाले उपस्थित ही नहीं थे। इस दौरान अपने मरीज को दिखवाने के लिए लोग इधर-उधर से पैरवी कराने में जुटे थे। ओपीडी में ऑनलाइन बुकिंग का चलन इतना तेज है कि कई विभागों में दो से तीन आगे तक के नंबर लगे हुए हैं।
बृजेश ने बताया कि उसे चर्म रोग के डॉक्टर से दिखवाना है, लेकिन उसकी बुकिंग 18 तारीख तक की हो चुकी है। नई डेट 19 तारीख की ही मिल रही है। इसी तरह कई अन्य विभागों का भी यही हाल है।
कर्मचारियों का व्यवहार कर रहा असहज
भाभी के साथ आई कुसुम ने बताया कि वह खलीलाबाद से सुबह नौ बजे यहां पहुंच गईं। उनकी पर्ची एक सप्ताह पहले की थी, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि इस पर दोबारा इंट्री करानी होती है। वह करीब 11 बजे तक इस काउंटर से उस काउंटर तक भटकती रहीं।
कोई कहता कि डॉक्टर आज नहीं देखेंगी तो कोई यह बता रहा था कि नंबर पहले लगवाना होता है, अब तक नहीं लगा तो अब नहीं लगेगा। उन्हें एक मरीज के परिजन ने तरीका बताया, तब काउंटर पर गईं और वहां से दोबारा परीक्षण की इंट्री कराकर वापस डॉक्टर के चैंबर के पास नंबर लगवाने आईं।
एम्स के मीडिया प्रभारी डॉ अरुप मोहंती ने बताया कि ऑनलाइन नंबर लगवाने की व्यवस्था मरीजों की सुविधा के लिए दी गई है। इस तरह की कोई शिकायत अभी नहीं आई है कि नंबर लगवाने के बाद 30 से 40 प्रतिशत मरीज नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को एक सप्ताह का डॉटा मंगाकर इसका परीक्षण किया जाएगा। अगर ऐसा होगा तो फिर इसके कारणों की जानकारी भी कराई जाएगी।