गोरखपुर। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण कार्य में मुआवजा का पेंच फंसा हुआ है। सड़क के लिए 26 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। लेकिन नए दर से मुआवजा की मांग को लेकर किसान अधिग्रहित जमीनों पर काम शुरू नहीं होने दे रहे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी किसान आर्बिट्रेशन जमा करा दें, तो मामला जल्दी सुलझ जाएगा।
जंगल कौड़िया जगदीशपुर रिंग रोड के लिए कोनी, रमवापुर, इटहिया और बालापार सहित 26 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इन गांवों के डेढ़ हजार किसान नई दर पर मुआवजे देने की मांग करते हुए सड़क निर्माण कार्य का विरोध कर रहे हैं। सड़क की जद में आ रहे 153 मकानों के लिए अलग से मुआवजा देने की मांग भी उठी है। इस मसले को लेकर किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई बार बातचीत हुई।
पिपराइच के विधायक महेंद्रपाल सिंह की अगुवाई में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से मिलकर संशोधित मुआवजा दिलाने की मांग उठाई। सीएम के निर्देश पर इस प्रकरण को सुलझाने के लिए डीएम, एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण), एसएलओ (विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी)और राजस्वकर्मियों की बैठक हो चुकी है। जिला प्रशासन की सलाह पर किसान आर्बिट्रेशन भी दाखिल करा रहे हैं। अभी तक कुल 600 किसानों ने आर्बिट्रेशन (न्यायिक मध्यस्थता) जमा कराया गया है। किसानों का हिस्सा प्रमाण पत्र लेखपाल बना रहे हैं।
किसानों के मुआवजा का भुगतान करने के लिए एनएचएआई की ओर से जिला प्रशासन को 100 करोड़ का भुगतान किया गया है। इसमें बालापार के किसानों को 10 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि जितनी जल्दी किसान आर्बिट्रेशन दाखिल करा देंगे। उतनी ही जल्दी संशोधित मुआवजा तैयार करा दिया जाएगा। जुलाई माह के अंत तक सभी किसानों ने अपने दस्तावेज जमा कराने की बात कही थी। लेकिन अभी तक 600 किसान ही प्रक्रिया पूरी कर सके हैं।
किसानों से अपील गई है कि आर्बिट्रेशन दाखिल कराएं, जिससे जल्द से जल्द मामले को सुलझाया जा सके। किसानों का हिस्सा प्रमाण पत्र लेखपाल तैयार कर रहे हैं। - सुशील कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी/ विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी