गोरखपुर। बाल रोग विशेषज्ञों के संगठन इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) की तरफ से सोमवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल समेत कई अन्य सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों, क्लीनिक में ओआरएस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बताया गया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण डायरिया से होने वाला डिहाइड्रेशन है। इन मौतों को ओआरएस का घोल देने भर से रोका जा सकता है।
आईएपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. डीके सिंह ने कहा कि आईएपी की बात, कम्युनिटी के साथ अभियान के दौरान लोगों को इस घोल के फायदे बताए जा रहे हैं। साथ ही मोटापा, खसरा, ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम और थैलेसीमिया जैसे विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। डॉ. शैलेश ने कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के बाद डायरिया दूसरी जानलेवा बीमारी है। डायरिया में लगभग 70 प्रतिशत मौतें डिहाइड्रेशन की वजह से होती है। पहले इसका प्रयोग केवल कॉलरा के लिए होता था, लेकिन अब लो मॉलीक्यूलर ओआरएस अन्य रोग में भी इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। जिला चिकित्सालय गोरखपुर में जन जागरूकता कार्यक्रम में डाॅ. गणेश गौरव, डाॅ. एलबी यादव, डाॅ. महेंद्र गुप्ता, डाॅ. बीके राय और डाॅ. विकास अग्रवाल मौजूद रहे। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र शर्मा, डाॅ. अनीता मेहता, डाॅ. अभिषेक सिंह, डाॅ. अजीत यादव, डाॅ. अदिति अग्रवाल, डाॅ. कुलदीप सिंह, डाॅ. विजय सिंह, डाॅ. प्रियंका सिंह इत्यादि मौजूद रहे।
तीन दशक में तीन गुना बढ़ा ओआरएस का उपयोग
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की 20-21 में आई रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 1992-93 में केवल 18 प्रतिशत लोग ओआरएस का उपयोग कर रहे थे। वहीं 98-99 में 27 प्रतिशत, 2015-16 में 51 प्रतिशत और 20-21 में 59 प्रतिशत लोग ओआरएस का उपयोग कर रहे हैं।