गोरखपुर। माफिया अजीत शाही ने तीन साल पुराने जिस मामले में एनबीडब्ल्यू कराकर कोर्ट में हाजिर होने का आधार बनाया था, उसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। पैरोकार ने पुलिस के पास दर्ज कराए गए बयान में एनबीडब्ल्यू की जानकारी से इन्कार कर दिया है। बताया है कि अजीत शाही का कोई भी एनबीडब्ल्यू उसे नहीं मिला था। इसके बाद पुलिस ने थाने की जीडी (जनरल डायरी) में भी चेक किया। वहां भी अंकित नहीं मिला है। फिलहाल, पुलिस ने रिकॉर्ड और बयान के आधार पर जांच तेज कर दी है।
पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की भी जांच की है, जिसमें अजीत शाही कोर्ट में वकील के पोशाक में दाखिल होता नजर आया है। उसे गेट के पास एक शख्स अधिवक्ता का कोट पहनाते नजर आ रहा है। पुलिस बार एसोसिएशन व जिला जज को इस संबंध में पत्र भी लिखने की तैयारी में है। दरअसल, गिरफ्तारी के लिए लगी पांच टीमों के बीच से अजीत शाही ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इससे पुलिस की किरकिरी हुई। इसके बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी। एसएसपी ने एसपी सिटी को जांच सौंपी है। एसपी ने जांच शुरू की तो पता चला कि एनबीडब्ल्यू पैरोकार के जरिए थाने में आना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जांच में दो बड़ी वजहें सामने आईं। पहली माफिया ने कचहरी में प्रवेश के लिए अधिवक्ता का पोशाक पहना और चेहरे पर काला चश्मा लगाया था। उसके प्रवेश के लिए वह रास्ता चुना, जहां से सिर्फ अधिवक्ता ही कचहरी में जाते हैं। उधर, पुलिस को जांच में पता चला है कि अजीत शाही पिपराइच की सीमा से सटे कुशीनगर के एक गांव में छिपा था। उस परिवार का रसूख है और सत्ता में दखल भी है। पुलिस ने पूरे प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री को दी है।
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कोट
पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। सहयोग के लिए जिला जज और बार एसोसिएशन से भी पत्राचार किया जाएगा।
डाॅ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी