गोरखपुर। धुरियापार चीनी मिल की जमीन अदाणी समूह को सीमेंट फैक्टरी के लिए दी जा सकती है। जिला प्रशासन के इस प्रस्ताव पर शासन ने गन्ना विभाग से इसकी नवैयत (वर्तमान स्थिति) की रिपोर्ट मांगी है। यह जमीन मिलने पर अदाणी समूह को फैक्टरी लगाना ज्यादा आसान होगा, क्योंकि यहां मिट्टी भराई से लेकर आवागमन के साधन तक उपलब्ध हैं।
अदाणी समूह ने पिछल साल ही गोरखपुर में निवेश की इच्छा जताई थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने इसके लिए गोरखपुर आकर कई जगह जमीन भी देखी थी। दो जमीन उन्हें पसंद आई, जिसमें से एक सहजनवां-दोहरीघाट प्रस्तावित रेललाइन के समीप है, जबकि दूसरी धुरियापार चीनी मिल की खाली जमीन है। पहली जमीन किसानों की है, जो धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में अधिग्रहित है, लेकिन अभी इसे किसानों से लिए जाने के साथ ही गीडा की तरफ से निर्धारित रेट पर ही आवंटित किया जा सकेगा।
धुरियापार चीनी मिल की जमीन सरकार की है, जिसे आवंटित करने में कम तकनीकी दिक्कतें आएंगी और निवेशक को भी फैक्टरी लगाने में मिट्टी भराई से लेकर अन्य कार्यों में सुविधा होगी। बगल की खाली जमीन पर विस्तार का भी मौका मिलेगा। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने शासन को प्रस्ताव भेजा था।
शासन स्तर से ही इस पर गन्ना विभाग से आख्या मांगी गई है। अगर जमीन को लेकर कोई तकनीकी पेच नहीं फंसा तो इसे ही अदाणी समूह को दिया जा सकता है।
नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जल्द होगा जमीनों का आवंटन
गीडा प्रशासन ने नई फैक्टरियों की स्थापना के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी सप्ताह अब तक आवंटित प्लाॅट व अवशेष प्लाॅटों का विवरण अपडेट हो जाएगा। इसके बाद शेष बचे प्लाॅटों के लिए विज्ञापन जारी होगा। जुलाई के पहले सप्ताह में प्लाॅटों का आवंटन कर दिया जाएगा, ताकि कंपनियां फैक्टरी स्थापित करने के लिए अपनी प्रक्रिया शुरू कर सकें। गीडा की तरफ से व्यावसायिक और औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन की प्रक्रिया चुनाव के चलते पिछले तीन महीने से रोकी गई थीं। इसके साथ ही कालेसर आवासीय और व्यावसायिक योजना के तहत प्रस्तावित प्लाटों का आवंटन भी शुरू हो जाएगा। ब्यूरो