बस्ती के कुदहरा ब्लॉक स्थित कौलपुर उर्फ चैनपुर गांव निवासी सुनील यादव 108 एंबुलेंस में चालक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर को घर पर खेलते समय पुत्र शिवांश की आंख में सुई घुस गई। उसे दिखाई देना भी बंद हो गया। कई जगह दिखाने पर भी ठीक नहीं हुआ। इंफेक्शन बढ़ने लगा तो कई डॉक्टरों को दिखाया पर समस्या दूर नहीं हुई। फिर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में डॉ. पंकज सोनी को दिखाया तो पुतली में छेद की जानकारी हुई।
भाई के साथ खेलते समय कक्षा तीन के छात्र शिवांश (8) की आंख में सूई घुस गई। पुतली में छेद होने से उसे दिखाई देना बंद हो गया। कई जगह उपचार हुआ लेकिन सुधार नहीं हुआ। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज सोनी ने उसके आंखों की रोशनी बचा ली। बच्चे की पुतली को कैप्सूल से अलग कर उसमें लेंस लगाया। इस विधि में न चीरा और न ही टांगा लगाना पड़ा।
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बस्ती के कुदहरा ब्लॉक स्थित कौलपुर उर्फ चैनपुर गांव निवासी सुनील यादव 108 एंबुलेंस में चालक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर को घर पर खेलते समय पुत्र शिवांश की आंख में सुई घुस गई। उसे दिखाई देना भी बंद हो गया। कई जगह दिखाने पर भी ठीक नहीं हुआ।
इंफेक्शन बढ़ने लगा तो कई डॉक्टरों को दिखाया पर समस्या दूर नहीं हुई। फिर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में डॉ. पंकज सोनी को दिखाया तो पुतली में छेद की जानकारी हुई। डॉ. सोनी ने इंफेक्शन रोकने के लिए दवाएं दीं और आंख के अंदर बने लीकेज को बंद किया।
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डॉ. पंकज सोनी ने बताया कि पांच जनवरी को अपनी टीम के साथ शिवांश को बेहोश कर ऑपरेशन किया, जिसमें पुतली को कैप्सूल से अलग कर उसमें लेंस लगाया गया। यह अत्याधुनिक सर्जरी फेको मशीन से की गई, जिसमें न चीरा लगाया गया और न ही टांके लगे।
ऑपरेशन के एक सप्ताह बाद शिवांश पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। उसे अब साफ दिखाई देता है। पिता ने बताया कि एक समय तो उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बेटे की आंख की रोशनी बचा ली गई।