सांठगांठ कर करोड़ों रुपये का गोलमाल
सूत्र बताते हैं कि खंड दफ्तर के जिम्मेदारों ने चेक की रकम से बड़ा खेल किया था। किसी भी बकाया बिल पर बिचौलिए की तरफ से बकाएदार के नाम और कनेक्शन नंबर से निगम दफ्तर में चेक जमा कर दिया जाता था। उस कनेक्शन नंबर पर भुगतान की पर्ची कट जाती थी और सर्वर से भी भुगतान के साथ बकाए की रकम को हटा दिया जाता था। इसके आगे का बिल उस कनेक्शन नंबर पर चार्ज ही नहीं होता था। बिचौलिए और बिजली निगम की सांठगांठ में बकाए की रकम को निपटा दिया जाता था। बकाया शून्य होने पर पीडी भी करवा दिया जाता था, ताकि बाद में मामला सामने न आए।
कुशीनगर में होगी स्पेशल ऑडिट
निदेशक वित्त ने कुशीनगर में स्पेशल ऑडिट के लिए मुख्य अभियंता को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि रोकड़ बही में उपभोक्ता के भुगतान के सापेक्ष गलत सूचना अंकित पाई गई है। प्राप्त चेकों से दो बार भुगतान किए जाने का रिकाॅर्ड मिला है। रोकड़ बही में बिलों के समाधान के सापेक्ष किसी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के हस्ताक्षर भी नहीं मिले हैं। ऐसे में 2016 तक और 2020 तक खंड में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की नामावली उपलब्ध कराई जाए और स्पेशल ऑडिट की जाए।
आंकड़े
| खंड |
चेक |
बकाया |
| गोरखपुर ग्रामीण ( प्रथम) |
380 चेक |
3.71 करोड़ रुपये |
| कुशीनगर |
127 चेक |
1.61 करोड़ रुपये |
| देवरिया |
79 चेक |
1.73 करोड़ रुपये |
| महाराजगंज |
44 चेक |
25 लाख रुपये |
मुख्य अभियंता आशु कालिया ने बताया कि निदेशक वित्त ने गोरखपुर के दोनों जोन में अनकैश और स्टेल चेकों के लिए पत्र लिखा है। खंडवार अनिवार्य रूप से रोकड़ बही से पूरा हिसाब कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित किया गया है। रिपोर्ट तैयार होते ही भेज दिया जाएगा।