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Gorakhpur News: बिजली दफ्तरों से 958 चेक 'लापता', सात करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं

Wed, 21 Feb 2024 01:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो रोहित सिंह, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर मंडल में बिजली निगम के खंडों में बिजली बिल भुगतान के संबंध में भारी गड़बड़ी मिली है। कई खंडों में उपभोक्ताओं के जमा किए चेक रिकॉर्ड में ही नहीं मिल रहे हैं। बिजली निगम के रोकड़ बही में उपभोक्ता और चेक का विवरण तक नहीं मिल रहा। 
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बिजली बिल( सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बिजली निगम में बकाया बिल जमा करने के लिए दिए गए 958 चेकों का अब तक हिसाब नहीं मिल पाया है। ये चेक वर्ष 2016 से 2020 के बीच के हैं। लगभग सात करोड़ रुपये के इस गोलमाल की आशंका है। सबसे अधिक 380 चेक गोरखपुर ग्रामीण खंड प्रथम के हैं। पावर कारपोरेशन के निदेशक वित्त एसके जाड़िया ने गोरखपुर जोन प्रथम और द्वितीय के मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर इन चेकों के बारे में जानकारी मांगी है।

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पूर्वांचल वितरण निगम के निदेशक वित्त ने गोरखपुर, प्रयागराज, बस्ती और वाराणसी मंडल में खंडों के बैंक समाधान विवरण की समीक्षा की। इस दौरान पता लगा कि करीब एक हजार उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने वर्ष 2016 से 2020 के बीच अपने बकाए चेक के माध्यम से जमा किए हैं और उसके आधार पर निगम के रिकॉर्ड में बकाया शून्य हो गया है, लेकिन उन चेकों का भुगतान नहीं हुआ है। मामले में गोलमाल की आशंका को देखते हुए जांच शुरू कराई गई।

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बिजली निगम के कुछ खंड ऐसे भी हैं, जहां यह ही नहीं पता कि जो चेक लापता हैं, वह किन उपभोक्ताओं के थे और निगम के रोकड़ बही में दर्ज किए गए थे या नहीं। चर्चा है कि सभी चेक बिजली बकाया भुगतान मद में जमा हुए और बाउंस हो गए। चेक बाउंस होने के बाद भी बकाएदारों के बिल भुगतान मान लिए गए। बकाएदारों ने बिल भुगतान की रसीद के माध्यम से अपने कनेक्शन भी परमानेंट डिस्कनेक्ट करा लिए।

अकेले गोरखपुर ग्रामीण खंड प्रथम में कुल 739 चेक लापता हुए थे। एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी अभी तक खंड में सिर्फ 359 चेक का रिकॉर्ड मिल सका है। अभी भी करीब चार करोड़ रुपये और 380 चेक लापता ही हैं।

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सांठगांठ कर करोड़ों रुपये का गोलमाल
सूत्र बताते हैं कि खंड दफ्तर के जिम्मेदारों ने चेक की रकम से बड़ा खेल किया था। किसी भी बकाया बिल पर बिचौलिए की तरफ से बकाएदार के नाम और कनेक्शन नंबर से निगम दफ्तर में चेक जमा कर दिया जाता था। उस कनेक्शन नंबर पर भुगतान की पर्ची कट जाती थी और सर्वर से भी भुगतान के साथ बकाए की रकम को हटा दिया जाता था। इसके आगे का बिल उस कनेक्शन नंबर पर चार्ज ही नहीं होता था। बिचौलिए और बिजली निगम की सांठगांठ में बकाए की रकम को निपटा दिया जाता था। बकाया शून्य होने पर पीडी भी करवा दिया जाता था, ताकि बाद में मामला सामने न आए।

कुशीनगर में होगी स्पेशल ऑडिट
निदेशक वित्त ने कुशीनगर में स्पेशल ऑडिट के लिए मुख्य अभियंता को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि रोकड़ बही में उपभोक्ता के भुगतान के सापेक्ष गलत सूचना अंकित पाई गई है। प्राप्त चेकों से दो बार भुगतान किए जाने का रिकाॅर्ड मिला है। रोकड़ बही में बिलों के समाधान के सापेक्ष किसी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के हस्ताक्षर भी नहीं मिले हैं। ऐसे में 2016 तक और 2020 तक खंड में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की नामावली उपलब्ध कराई जाए और स्पेशल ऑडिट की जाए।
आंकड़े
 
खंड चेक  बकाया
गोरखपुर ग्रामीण ( प्रथम) 380 चेक 3.71 करोड़ रुपये
कुशीनगर 127 चेक 1.61 करोड़ रुपये
देवरिया 79 चेक 1.73 करोड़ रुपये
महाराजगंज 44 चेक 25 लाख रुपये


मुख्य अभियंता आशु कालिया ने बताया कि निदेशक वित्त ने गोरखपुर के दोनों जोन में अनकैश और स्टेल चेकों के लिए पत्र लिखा है। खंडवार अनिवार्य रूप से रोकड़ बही से पूरा हिसाब कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित किया गया है। रिपोर्ट तैयार होते ही भेज दिया जाएगा।
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