1. Identity... अब विरासत नहीं, Personal Project है
कुछ दशक पहले तक इंसान की पहचान उसके परिवार, धर्म, जाति, गांव या पेशे से तय की जाती थी। लेकिन आज का युवा खुद तय करना चाहता है कि वह कौन है? वह क्या पहनता है? क्या सोचता है? किस तरह का Career चाहता है? और दुनिया उसे किस रूप में देखे? सोशल मीडियाने इस बदलाव को और तेज कर दिया है। अब पहचान कोई एक बार बनने वाली चीज नहीं, बल्कि लगातार बदलने वाली प्रक्रिया बन गई है। यानी आज की जनरेशन सिर्फ जिंदगी नहीं जीनी, बल्कि अपनी पहचान भी खुद बनानी पड़ रही है।
2. घर खरीदना मुश्किल... इसलिए बदल गया खर्च करने का तरीका
अगर आज किसी युवा से पूछा जाए कि सबसे मुश्किल सपना क्या है? तो शायद जवाब होगा अपना घर। दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा 20 और 30 की उम्र तक अपने माता-पिता के साथ रह रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने जिंदगी जीना छोड़ दिया है। बस उनकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। ब लोग लाखों रुपये घर की डाउन पेमेंट के लिए नहीं, बल्कि यात्रा, गैजेट्स, कॉन्सर्ट, कॉफी, फिटनेस और अनुभव पर खर्च कर रहे हैं। यानी ओनरशिप की जगह एक्सपीरियंस ज्यादा मायने रखने लगा है।
3. Job अब सिर्फ नौकरी नहीं, Survival का सवाल भी है
एक समय था जब लोग एक ही कंपनी में 25-30 साल काम करते थे। आज ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। Gen Z पहले से कहीं ज्यादा तेजी से जॉब बदल रहे हैं। कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स,फ्रीलांसिंग और रिमोट वर्क बढ़ रहे हैं। उधर AI ने नई चिंता पैदा कर दी है। कई युवाओं को लगता है कि आने वाले समय में एआई उनके काम का तरीका बदल सकती है या कुछ नौकरियां खत्म भी हो सकती हैं। यानी कॅरियर का रास्ता अब पहले जैसा सीधा नहीं रहा। हर कुछ साल में खुद को फिर से सीखना और बदलना नई मजबूरी बनता जा रहा है।
4. Relationship भी पहले जैसे नहीं रहे
एक समय था जब रिश्ते पड़ोस, कॉलेज, परिवार या ऑफिस से शुरू होते थे। आज एक स्वाइप से रिश्ता शुरू होता है...और कई बार एक मैसेज के बिना खत्म भी हो जाता है। Dating Apps ने लोगों को ज्यादा विकल्प दिए हैं, लेकिन रिश्तों में स्थिरता कम हुई है। इसी दौर में Situationship जैसे शब्द सामने आए। यानी रिश्ता है लेकिन उसका कोई तय नाम नहीं, कोई तय मंजिल नहीं। इसके साथ ही लोग पहले की तुलना में देर से शादी कर रहे हैं, कम बच्चे पैदा कर रहे हैं और अकेले रहने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। रिश्ते खत्म नहीं हुए हैं बस उनका स्वरूप बदल गया है।
5. Future हमारा... लेकिन फैसले कौन ले रहा है?
आज की युवा पीढ़ी को सिर्फ नौकरी या घर की चिंता नहीं है। उसे यह भी लगता है कि जिन फैसलों का असर उसके भविष्य पर पड़ेगा, उन्हें लेने वाले ज्यादातर लोग उसी पीढ़ी से नहीं आते। बिजनेस हो, राजनीति हो या बड़े संस्थान हर जगह निर्णय लेने वालों की औसत उम्र युवाओं से काफी ज्यादा है। यानी Future की सबसे बड़ी कीमत युवा चुकाएंगे लेकिन Future की दिशा तय करने में उनकी भूमिका सबसे कम है। यही वजह है कि सरकार, मीडिया और बड़ी कंपनियों पर उनका भरोसा लगातार कम हो रहा है।
आखिर इसका मतलब क्या है?
Liquid Adulthood का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि Gen Z मेहनत नहीं करना चाहते या जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। असल में दुनिया की बुनियाद बदल चुकी है। पहले पहचान तय होती थी आज बनानी पड़ती है। पहले नौकरी स्थायी होती थी आज लगातार बदलती है। पहले घर वयस्क होने की निशानी था आज वह कई लोगों के लिए पहुंच से बाहर है। पहले रिश्ते जीवनभर निभाने की सोच के साथ शुरू होते थे आज वे भी बदलती परिस्थितियों के साथ बदल रहे हैं। यानी बड़े होने का मतलब खत्म नहीं हुआ बस उसकी परिभाषा बदल गई है।