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Dating Trend: क्या है Pheromone maxxing, डेट से पहले क्यों नहा नहीं रहे Gen Z पुरुष?

Mon, 07 Sep 2026 06:23 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

डेट से पहले जेन जी लड़कों के बीच नहाना छोड़कर नेचुरल बॉडी स्मेल पर भरोसा करने का ट्रेंड इन दिनों चर्चा में है। इसे Pheromone maxxing कहा जा रहा है। लेकिन क्या सच में यह डेटिंग ट्रेंड अट्रैक्शन का सीक्रेट है? आइए जानते हैं।
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डेटिंग ट्रेंड - फोटो : Ai
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विस्तार
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डेट पर जाने से पहले अच्छे कपड़े, हेयरस्टाइल, परफ्यूम और डियोड्रेंट का इस्तेमाल करना आम बात है। लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ Gen Z पुरुषों के बीच एक ऐसा ट्रेंड चर्चा में है, जिसमें डेट से पहले नहाने तक को छोड़ने की बात कही जा रही है।

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इस ट्रेंड का नाम है 'Pheromone maxxing'। इसके पीछे सोच है कि साबुन और डियोड्रेंट से शरीर की नेचुरल गंध को छिपाने के बजाय उसे ही आकर्षण का जरिया बनाया जाए। दावा किया जा रहा है कि शरीर की प्राकृतिक गंध में मौजूद फेरोमोन सामने वाले व्यक्ति को आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन क्या वाकई बिना नहाए डेट पर जाना आपको ज्यादा आकर्षक बना सकता है?

क्या है 'Pheromone maxxing'?

'Pheromone maxxing' सोशल मीडिया के 'Looksmaxxing' चलन का एक अजीब रूप माना जा सकता है। Looksmaxxing में लोग अपनी शक्ल-सूरत और व्यक्तित्व को ज्यादा आकर्षक बनाने के अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। Pheromone maxxing में इसके उलट शरीर की प्राकृतिक गंध को ही आकर्षण का हिस्सा बनाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए कुछ लोग साबुन, डियोड्रेंट और कभी-कभी नहाना तक छोड़ने की बात कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे एक आसान आकर्षण वाले उपाय के रूप में पेश किया जा रहा है। लेकिन प्राकृतिक गंध और इंसानों में फेरोमोन के जरिए आकर्षण पैदा होने की बात दो अलग चीजें हैं।

फेरोमोन क्या होते हैं?

फेरोमोन वास्तविक रासायनिक संकेत होते हैं, जिनका इस्तेमाल कई जानवर आपस में संवाद करने या साथी को आकर्षित करने के लिए करते हैं। चींटियां फेरोमोन की मदद से रास्ते बनाती हैं, जबकि कुछ कीट साथी को आकर्षित करने के लिए इन संकेतों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इंसानों में मामला इतना आसान नहीं है। शरीर की गंध किसी व्यक्ति के प्रति हमारी पसंद या नापसंद को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, अभी तक ऐसा मजबूत वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है कि इंसानों में कोई खास फेरोमोन होता है, जिसे बढ़ाकर किसी को अपनी ओर आकर्षित किया जा सकता है।

ऑक्सफोर्ड से जुड़े शोध में भी इंसानों की प्राकृतिक शरीर की गंध और आकर्षण के बीच संबंध को देखा गया है। शोध से संकेत मिलता है कि प्राकृतिक गंध किसी व्यक्ति की पसंद या आकर्षण को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि इंसानों में फेरोमोन को बढ़ाकर किसी को ज्यादा आकर्षक बनाया जा सकता है। यानी नहाना छोड़ देना आकर्षण बढ़ाने का कोई वैज्ञानिक फॉर्मूला नहीं है।

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डेटिंग ट्रेंड - फोटो : Ai

कहां से आया नहाने से जुड़ा यह आइडिया?

इस चलन को समझने के लिए 1995 में हुए चर्चित 'Sweaty T-shirt' प्रयोग का जिक्र जरूरी है। इसमें महिलाओं को अलग-अलग पुरुषों की पहनी हुई टी-शर्ट सूंघने को दी गई थीं। शोध में कुछ संकेत मिले कि महिलाएं कभी-कभी ऐसे पुरुषों की गंध को पसंद कर सकती हैं, जिनके प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़े जीन यानी MHC उनके अपने जीन से अलग हों। लेकिन बाद के शोधों में इसके नतीजे एक जैसे नहीं रहे।

2020 में पहले किए गए कई अध्ययनों के विश्लेषण में भी इस बात के मजबूत सबूत नहीं मिले कि लोग लगातार ऐसे साथी को पसंद करते हैं जिनके MHC जीन उनसे अलग हों। इसलिए इस प्रयोग को आधार बनाकर यह कहना कि बिना नहाए रहने से प्यार या आकर्षण बढ़ जाएगा, सही नहीं होगा।

फिर Gen Z के बीच यह चलन क्यों चर्चा में है?

इसके पीछे सोशल मीडिया की 'आसान उपाय' वाली संस्कृति भी एक वजह हो सकती है। आज सोशल मीडिया पर बेहतर दिखने, ज्यादा आत्मविश्वासी बनने और डेट पर अच्छा प्रभाव डालने के लिए तरह-तरह के उपाय बताए जाते हैं। हर चीज का एक आसान तरीका खोजने की कोशिश होती है।

'Pheromone maxxing' भी इसी सोच का हिस्सा है। इसका आकर्षण इसलिए है क्योंकि लोगों को लगता है कि बिना ज्यादा मेहनत के कोई ऐसा तरीका मिल सकता है, जिससे वे दूसरे व्यक्ति को ज्यादा आकर्षक लगें। लेकिन रिश्ते किसी एक आसान उपाय से नहीं चलते। किसी को आपका आत्मविश्वास पसंद आ सकता है, किसी को आपकी बातचीत, किसी को आपका मजाकिया अंदाज और किसी को आपका व्यक्तित्व। सिर्फ शरीर की गंध से किसी रिश्ते का फैसला हो जाए, ऐसा विज्ञान ने साबित नहीं किया है।

क्या बिना नहाए डेट पर जाना सही है?

विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक गंध और साफ-सफाई की कमी को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। हर व्यक्ति की शरीर की अपनी प्राकृतिक गंध होती है और कई बार किसी करीबी व्यक्ति की खास खुशबू हमें अच्छी भी लग सकती है। खुशबू का संबंध यादों और भावनाओं से भी होता है।

लेकिन लंबे समय तक न नहाने से पसीना, बैक्टीरिया, मृत त्वचा और गंदगी शरीर पर जमा हो सकती है। इससे बदबू के साथ त्वचा संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं। और पहली मुलाकात में सामने वाले को यह समझाना कि साफ-सफाई की कमी असल में आकर्षण बढ़ाने की रणनीति है, शायद अच्छा प्रभाव डालने का सबसे बेहतर तरीका नहीं है।

तो क्या इस चलन में थोड़ी भी सच्चाई है?

इतना जरूर है कि इंसान प्राकृतिक गंध को महसूस करते हैं और उससे किसी व्यक्ति के प्रति पसंद या नापसंद बन सकती है। लेकिन इसे जानबूझकर न नहाने से जोड़ना सही नहीं होगा। अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक फॉर्मूला नहीं है जो यह साबित करे कि नहाना छोड़ने से आकर्षण बढ़ता है।
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