रिपोर्ट में क्या सामने आया?
इस रिपोर्ट में 20 से ज्यादा इंडस्ट्री के 57 लाख (5.7 मिलियन) से अधिक कर्मचारियों का फीडबैक लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक 63% भारतीय कंपनियों का कहना है कि कर्मचारी अब पहले जैसी अतिरिक्त मेहनत नहीं करना चाहते। 2023 के मुकाबले Extra Effort में चार फिसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यानी यह बदलाव धीरे-धीरे नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ रहा है।
वर्कफोर्स में जेन जी की कितनी भागीदारी?
आज ऑफिस में सबसे बड़ा बदलाव नई पीढ़ी लेकर आई है। 2023 में भारतीय वर्कफोर्स में जेन जी की हिस्सेदारी 13% थी। अब यह बढ़कर 26% हो चुकी है। यानी अब हर चार कर्मचारियों में लगभग एक Gen Z है। उनकी सोच पहले की पीढ़ियों से काफी अलग है।
Gen Z आखिर चाहते क्या हैं?
पहले लोग अच्छी नौकरी और स्थायी सैलरी को सबसे बड़ी सफलता मानते थे। लेकिन Gen Z के लिए सिर्फ पैसा काफी नहीं है। उन्हें चाहिए वर्क-लाइफ बैलेंस, फ्लेक्सिबल वर्किंग, मीनिंगफुल वर्क, करियर ग्रोथ, रिस्पेक्ट, मेंटल पीस। उनका मानना है कि ऑफिस जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं।
इसलिए कम हो रहा है Extra Effort
Gen Z का कहना है:
- अगर रोज देर रात तक काम करना पड़े...
- अगर हर वीकेंड ऑफिस के लिए देना पड़े...
- अगर हर समय ऑनलाइन रहना पड़े...
- तो यह मेहनत नहीं, बल्कि Burnout है।
नई पीढ़ी Smart Work में भरोसा करती है, सिर्फ लंबे समय तक काम करने में नहीं।
कंपनियां भी उलझन में हैं
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग हर दो में से एक सीएचआरओ मानता है कि उसे अभी तक समझ नहीं आया कि Gen Z को सबसे ज्यादा क्या मोटिवेट करता है। वहीं 58% से ज्यादा HR प्रमुख एक साथ दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं;
1.Gen Z की उम्मीदों को समझना।
2.एआई के दौर के लिए कंपनी को तैयार करना।
एआई ने भी बढ़ाया दबाव
आज लगभग हर कंपनी AI अपना रही है। उम्मीद थी कि इससे कर्मचारियों का काम आसान होगा। लेकिन कई जगह उल्टा हो रहा है। एआई की वजह से काम पहले से ज्यादा तेजी से पूरा करने की उम्मीद बढ़ गई, डेडलाइन छोटी हो गई, कर्मचारियों पर ज्यादा काम का दबाव आने लगा। रिपोर्ट के मुताबिक हर पांच में से दो CHRO मानते हैं कि अलग-अलग टीमों में एआई को लागू करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं सिर्फ हर चार में से एक कंपनी ही AI की सफलता को रेवेन्यू या कस्टमर इम्पैक्ट जैसे असली बिजनेस नतीजों से माप रही है।
Free Pizza नहीं, अच्छा Leader चाहिए
रिपोर्ट का सबसे बड़ी बात यह निकल कर आई कि कर्मचारियों को सिर्फ अच्छी सैलरी या ऑफिस की सुविधाएं खुश नहीं रख सकतीं। उन्हें ऐसे लीडर चाहिए जो उनकी बात सुनें, उन पर भरोसा करें, उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें, काम का उद्देश्य समझाएं। जहां कर्मचारियों का अपने नेताओं पर भरोसा ज्यादा होता है, वहां प्रोडक्टिविटी 47% ज्यादा, एजिलिटी 56% बेहतर, इनोवेशन 34% अधिक, कस्टमर एप्रिसिएशन 52% ज्यादा देखी गई।