फिल्म खुद बता देती है कहां जाना है?
Set-Jetting का एक फायदा यह भी है कि फिल्म या वेब सीरीज घूमने का आधा प्लान पहले ही तैयार कर देती है। कहानी देखते हुए दर्शक जान लेते हैं कि कौन-सी सड़क खूबसूरत है, कौन-सा कैफे अच्छा है और किस जगह का नजारा शानदार है। इसके बाद सोशल मीडिया इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है। किसी फिल्म का एक सीन सोशल मीडिया पर वायरल होता है। लोग उसमें दिखाई गई जगह का नाम खोजते हैं और फिर उसी जगह से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और ट्रैवल गाइड सामने आने लगते हैं। कई बार पूरी फिल्म देखने की भी जरूरत नहीं पड़ती। कुछ सेकंड का वायरल वीडियो भी किसी जगह को ट्रैवल लिस्ट में शामिल करने के लिए काफी होता है।
बॉलीवुड ने तो दशकों पहले शुरू कर दिया था ये काम
दिलचस्प बात यह है कि Set-Jetting भारत के लिए कोई नया ट्रेंड नहीं है। बॉलीवुड फिल्मों के जरिए लंबे समय से लोगों के ट्रैवल सपने बनाता रहा है। निर्देशक यश चोपड़ा इसका बड़ा उदाहरण हैं। 1990 के दशक से उनकी फिल्मों के रोमांटिक गानों में स्विट्जरलैंड की बर्फीली वादियां बार-बार दिखाई दीं। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और मोहब्बतें जैसी फिल्मों ने भारतीय दर्शकों के बीच स्विट्जरलैंड को एक ड्रीम डेस्टिनेशन की तरह लोकप्रिय बनाया। स्विट्जरलैंड की पर्यटन व्यवस्था ने भी यश चोपड़ा के योगदान को माना। उन्हें इंटरलाकेन का एंबेसडर बनाया गया और उनके सम्मान में वहां एक झील का नाम भी जोड़ा गया। यानी जिस ट्रेंड को आज Set-Jetting कहा जा रहा है, बॉलीवुड उसका इस्तेमाल काफी पहले से करता आ रहा था।
जिंदगी ना मिलेगी दोबारा ने स्पेन का सपना दिखाया
2011 में आई जिंदगी ना मिलेगी दोबारा ने भारतीय युवाओं के बीच स्पेन की एक अलग तस्वीर बनाई। फिल्म में तीन दोस्तों की स्पेन यात्रा दिखाई गई। स्पेन की सड़कें, खूबसूरत ग्रामीण इलाके, पैम्पलोना में बुल रन और स्काईडाइविंग जैसे दृश्यों ने युवाओं को इस देश की ओर आकर्षित किया। फिल्म रिलीज होने के बाद भारत से स्पेन जाने वाले यात्रियों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखी गई। भारतीय यात्रियों की संख्या करीब 30 हजार से बढ़कर 60 हजार से ज्यादा हो गई और बाद के वर्षों में यह आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया। फिल्म ने स्पेन को कई भारतीय युवाओं की ट्रैवल लिस्ट का हिस्सा बना दिया।
लंदन को भी बॉलीवुड ने बनाया खास
लंदन भी लंबे समय से बॉलीवुड फिल्मों की पसंदीदा लोकेशन रहा है। कभी खुशी कभी गम और नमस्ते लंदन जैसी फिल्मों में लंदन की सड़कों और इमारतों को जिस तरह दिखाया गया, उससे भारतीय दर्शकों के लिए शहर और भी जाना-पहचाना हो गया। ब्रिटेन में बॉलीवुड की लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय दर्शकों के लिए फिल्मों की शूटिंग वाली जगहों को जोड़कर Bollywood Map of Britain जैसी पहल भी की गई। इससे दर्शक उन जगहों को घूम सकते हैं, जिन्हें उन्होंने फिल्मों में देखा है।
आज इस ट्रेंड में क्या फर्क है?
बॉलीवुड और ट्रैवल का रिश्ता पुराना है, लेकिन आज स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया ने इसकी रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है। पहले किसी फिल्म के लोकप्रिय होने और उसके कारण किसी जगह पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने में महीनों या वर्षों का समय लग सकता था। अब एक वेब सीरीज का नया सीजन रिलीज हुआ, कोई लोकेशन वायरल हुई और कुछ ही दिनों में लोग उस जगह के बारे में सर्च करने लगते हैं। यानी आज किसी जगह को ट्रेंड करने के लिए सिर्फ बड़ी फिल्म जरूरी नहीं है। एक वायरल सीन भी हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच सकता है।
क्या Set-Jetting सिर्फ एक ट्रेंड है?
शायद नहीं। यह युवा पीढ़ी के बदलते ट्रैवल व्यवहार की ओर भी इशारा करता है। आज लोग सिर्फ ऐसी जगह नहीं चुनना चाहते जो देखने में खूबसूरत हो, बल्कि ऐसी जगह भी पसंद करते हैं जिसके साथ कोई कहानी या अनुभव जुड़ा हो। फिल्म या वेब सीरीज उन्हें उस जगह से पहले ही भावनात्मक रूप से जोड़ देती है। बॉलीवुड ने इस तरह के ट्रैवल प्रभाव को दशकों पहले ही दिखा दिया था। स्विट्जरलैंड से लेकर स्पेन और लंदन तक कई जगहों की लोकप्रियता में फिल्मों की भूमिका देखी गई।
फर्क सिर्फ इतना है कि पहले इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता था। अब स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया के दौर में एक सीन कुछ ही दिनों में किसी जगह को लोगों की ट्रैवल लिस्ट में पहुंचा सकता है। यानी कल रात स्क्रीन पर देखी कोई जगह, आज आपकी अगली मंजिल बन सकती है।