महंगाई बढ़ रही है, पढ़ाई का खर्च बढ़ रहा है और नौकरी का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे माहौल में बड़े हुए Gen Z जानते हैं कि सिर्फ एक नौकरी के भरोसे भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि आज के युवा सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि नई स्किल्स पर भी फोकस कर रहे हैं।
पैसा जरूरी है, लेकिन सीखना उससे भी ज्यादा अहम
कुछ साल पहले तक नौकरी चुनने का सबसे बड़ा पैमाना सैलरी हुआ करता था। लेकिन आज के युवाओं की सोच बदल रही है। उन्हें पता है कि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और कई नौकरियां आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकती हैं। ऐसे में नई स्किल्स सीखना उनके लिए एक तरह का करियर इंश्योरेंस बन गया है। Gen Z का मानना है कि अगर स्किल्स मजबूत होंगी तो अच्छी सैलरी अपने आप मिलेगी, लेकिन सिर्फ अच्छी सैलरी होने से करियर सुरक्षित नहीं होता।
सिर्फ काम नहीं, वर्क-लाइफ बैलेंस भी है जरूरी
Gen Z के लिए सफलता का मतलब सिर्फ ऑफिस में प्रमोशन पाना नहीं है। वे वर्क-लाइफ बैलेंस को भी उतनी ही अहमियत देते हैं। यह पीढ़ी ऐसे वर्कप्लेस चाहती है, जहां उन्हें सीखने के मौके मिलें, फ्लेक्सिबल टाइमिंग, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए और निजी जिंदगी के लिए भी समय मिले। यही वजह है कि कई युवा अब नौकरी चुनते समय सैलरी के साथ-साथ कंपनी की संस्कृति और सीखने के अवसरों को भी देखते हैं। युवा मानते हैं कि लंबे समय तक करियर में टिके रहने के लिए स्किल्स के साथ-साथ वर्क-लाइफ बैलेंस भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
तारीफ और पहचान भी है जरूरी
आज के युवा सिर्फ महीने के अंत में मिलने वाली सैलरी से खुश नहीं होते। वे चाहते हैं कि उनके काम को पहचाना जाए और उनकी मेहनत की सराहना हो। फीडबैक, सीखने के अवसर, नई जिम्मेदारियां और करियर ग्रोथ, ये सभी चीजें Gen Z के लिए उतनी ही जरूरी हैं जितनी सैलरी।
बॉस नहीं, ठहरी हुई ग्रोथ करती है ज्यादा परेशान
अक्सर माना जाता है कि Gen Z को सबसे ज्यादा दिक्कत माइक्रोमैनेजमेंट यानी हर छोटी-बड़ी बात में बॉस के दखल से होती है, लेकिन रिपोर्ट कुछ अलग कहानी बताती है।
16% Gen Z प्रोफेशनल्स ने माइक्रोमैनेजमेंट को अपने तनाव की बड़ी वजह बताया। वहीं, मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 25% है। इसी तरह, 19% युवाओं ने कहा कि ऑफिस के टॉक्सिक सहकर्मी उन्हें तनाव देते हैं। इसका मतलब है कि Gen Z के लिए सबसे बड़ी चिंता ऑफिस पॉलिटिक्स या बॉस नहीं, बल्कि काम और जिंदगी के बीच संतुलन की कमी और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों का न मिलना है।