कैसे वायरल हुआ Polyester?
यह शब्द एक 18 वर्षीय युवक के टिकटॉक वीडियो के बाद चर्चा में आया। उसने अपनी ड्रीम लाइफ के बारे में बताया था। इसमें सुबह 6 बजे न्यूयॉर्क के पेंटहाउस में उठना, पार्क में दौड़ना और डिप वर्क करना शामिल था। उसके काम का बड़ा हिस्सा एआई एजेंट संभालता। लोगों को उसकी यह लाइफस्टाइल जरूरत से ज्यादा सजी-संवरी और बनावटी लगी। इसके बाद लोगों ने इसे Polyester कहना शुरू कर दिया।
Gen Z को बनावटी चीजों से परेशानी क्यों?
Gen Z ऐसी दुनिया में बड़ी हुई है, जहां सोशल मीडिया पर तस्वीरों से लेकर पूरी लाइफस्टाइल तक को एडिट और क्यूरेट करके दिखाया जा सकता है। इसलिए अब सिर्फ परफेक्ट दिखना ही काफी नहीं है। लोग यह भी देख रहे हैं कि जो दिखाया जा रहा है, क्या वह सच में वैसा ही है?
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, Gen Z के लिए असलियत का मतलब हर चीज को बिना फिल्टर या बिना तैयारी के दिखाना नहीं है। ज्यादा जरूरी यह है कि इंसान जो कह रहा है और जो कर रहा है, उनमें कितना मेल है। यानी कोई व्यक्ति जिस लाइफस्टाइल की बात करता है, अगर वह वास्तव में उसकी जिंदगी का हिस्सा है तो वह असली है। लेकिन अगर वह सिर्फ सोशल मीडिया पर अच्छा दिखने के लिए ऐसा कर रहा है, तो उसे बनावटी माना जा सकता है।
सिर्फ लाइफस्टाइल नहीं, फैशन पर भी निशाना
Polyester का इस्तेमाल ओवरकंजम्प्शन, अल्ट्रा-फास्ट फैशन और दिखावे वाली लाइफस्टाइल को लेकर भी Gen Z की सोच को दिखाता है। Polyester के पर्यावरण पर असर को लेकर भी चिंता जताई जाती है। यह बायोडिग्रेडेबल नहीं है और माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकता है। इसलिए इस शब्द के साथ कृत्रिम और बड़े पैमाने पर बनाई जाने वाली चीजों को लेकर नकारात्मक भाव भी जुड़ गया है।