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फोन हाथ में, फाइनेंस दिमाग में: Gen Z बदल रहे भारत का बाजार, क्या 2047 का सपना इन नए हाथों से होगा साकार?

Sun, 17 May 2026 06:50 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

क्या Gen Z सिर्फ खर्च करने वाली पीढ़ी है या फिर आने वाले भारत की सबसे मजबूत आर्थिक ताकत? हाथ में मोबाइल, दिमाग में नए-नए इन्वेस्टमेंट आइडिया और जेब में कमाई के कई रास्ते... आज की युवा पीढ़ी तेजी से बदल रही है। सवाल ये है कि क्या यही बदलाव 2047 का भारत तय करेगा?
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Gen Z खर्च करने वाली नहीं! - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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इतने पैसे क्यों खर्च कर रही हो? हर हफ्ते बाहर खाना जरूरी है क्या? क्या जरूरत है बेकार की चीजों पर पैसे खर्च करने की?... लगभग हर Gen Z ये बातें रोज सुनता होगा। चाहे मामला महंगे जूते खरीदने की हो, किसी म्यूजिक कन्सर्ट में जाने की या फिर अचानक बने घूमने जाने के प्लान की। आज की जनरेशन (जेन जी)  खुलकर खर्च करती है, अपनी पसंद पर पैसा लगाती है और जिंदगी को उस वक्त के हिसाब से जीना पसंद करती है। लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो जाती।
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जिस जेन जी को अक्सर शॉपिंग जनरेशन या तुरंत की खुशी में जीने वाली पीढ़ी कहा जाता है, वही जनरेशन आज सबसे कम उम्र में  निवेश, एसआईपी, म्यूचुअल फंड और स्टॉक्स की दुनिया में भी कदम रख रही है। यह पीढ़ी जितनी तेजी से पैसा खर्च करती है, उतनी ही तेजी से पैसे के बारे में सीख भी रही है।

आज का युवा सिर्फ सैलरी का इंतजार नहीं कर रहा। वह नौकरी की शुरुआत में होने वाली इंटर्नशिप  के पैसों से एसआईपी शुरू कर रहा है, इंस्टाग्राम रील्स देखकर स्टॉक मार्केट समझ रहा है, बजट कंट्रोल करने वाले एप से से खर्च ट्रैक कर रहा है और कॉलेज के दौरान ही फ्रीलांसिंग या अतिरिक्त काम से पैसे बनाने की कोशिश कर रहा है। यानी जेन-जी का पैसे कमाने का तरीका थोड़ा उलझा हुआ जरूर दिखता है, लेकिन यह पीढ़ी स्मार्ट भी है और जल्दबाजी में फैसले लेने वाली भी। यह बचत भी कर रही है और खर्च भी। निवेश भी कर रही है और ट्रेंड्स के पीछे भी भाग रही है।
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भारत की सबसे बड़ी युवा ताकत
भारत में नई पीढ़ी के युवाओं की संख्या करीब 37 से 40 करोड़ के बीच मानी जाती है। यानी देश की बड़ी आबादी वही युवा हैं जो मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन भुगतान के दौर में बड़े हुए हैं। यह सिर्फ तकनीक से जुड़ी रहने वाली पीढ़ी नहीं है, बल्कि देश के विकास के लिए एक बड़ी आर्थिक ताकत बन चुकी है।

डेलॉयट की रिपोर्ट के मुताबिक, आज यह युवा पीढ़ी भारत के खरीदार बाजार में लगभग 200 अरब डॉलर की सीधी हिस्सेदारी दे रही है। वहीं परिवारों के खर्चों पर इनके असर को 860 अरब डॉलर तक माना जाता है। जानकारों का अनुमान है कि 2035 तक भारत के कुल खर्च में इस पीढ़ी की हिस्सेदारी करीब 46 प्रतिशत हो सकती है। मतलब साफ है कि यह पीढ़ी सिर्फ चलन नहीं बदल रही, बल्कि बाजार भी चला रही है।

आखिर यह पीढ़ी पैसे को लेकर इतनी अलग क्यों है?
हर पीढ़ी का पैसा संभालने का तरीका उस समय से तय होता है, जिसमें वह बड़ी होती है। इस युवा पीढ़ी ने बचपन से एक ऐसी दुनिया देखी है, जहां...
  • महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।
  • अच्छी पढ़ाई बेहद महंगी हो चुकी है।
  • स्थायी नौकरियों की गारंटी कम ही है।
  • जॉब से निकाले जाने की घटनाएं आम हैं।
  • घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।
  • पूरी अर्थव्यवस्था ऑनलाइन हो चुकी है।
यही वजह है कि यह पीढ़ी पैसे को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है। उन्हें पता है कि आने वाला समय पैसों के मामले में आसान नहीं होने वाला। पहले की पीढ़ी अक्सर 30 साल की उम्र के बाद निवेश के बारे में सोचती थी, लेकिन आज के किशोर और 20 साल की उम्र के युवा पैसों की समझ जल्दी सीखना शुरू कर रहे हैं। कई रिपोर्ट बताती हैं कि बड़ी संख्या में युवा 25 साल की उम्र से पहले निवेश शुरू कर रहे हैं।
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मोबाइल बना पहला पैसों का सलाहकार
इस पीढ़ी और बाकी पीढ़ियों के बीच सबसे बड़ा फर्क शायद सोच का नहीं, बल्कि सुविधा का है। पहले निवेश का मतलब होता था बैंक, कागजी काम और पैसों के सलाहकार। अब निवेश सिर्फ एक ऐप डाउनलोड करने जितना आसान हो गया है। आज की युवा पीढ़ी के लिए फोन सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पैसों से जुड़ी पूरी दुनिया है।

एक ही स्क्रीन पर सबकुछ:
  • यूपीआई का भुगतान भी इसी से है।
  • नियमित निवेश वाले ऐप भी मौजूद।
  • शेयर बाजार की उठा-पटक की खबर।
  • डिजिटल करेंसी खरीदने-बेचने का मंच। 
  • खर्च मैनेज करने वाले टूल भी हैं मौजूद ।
  • पैसों की जानकारी देते छोटे वीडियो।

यही कारण है कि यह पीढ़ी निवेश को किसी कठिन चीज की तरह नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानने लगी है। लेकिन यही तेजी कभी-कभी खतरा भी बन जाती है। पैसों की जानकारी अब क्लास से ज्यादा इंस्टाग्राम और यूट्यूब की छोटी वीडियो से आ रही है।

30 सेकंड की वीडियो में:
  • एक महीने में पैसा दोगुना कैसे करें
  • यह शेयर अभी खरीद लो होगा फायदा
  • डिजिटल करेंसी से जल्दी अमीर बनो
सोशल मीडिया की जानकारी पहुंचा सकती है नुकसान 
जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया ने पैसों की जानकारी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन कई बार उसे जरूरत से ज्यादा चमकदार भी बना दिया है। समस्या यह है कि जब पैसों की सलाह मनोरंजन की तरह दिखाई जाने लगे, तब सही और गलत में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि कई युवा निवेश और सट्टेबाजी के बीच का फर्क ठीक से समझ नहीं पाते। फिर सवाल वही है कि क्या यह युवा पीढ़ी सच में पैसों के मामले में समझदार है? जवाब है हां, लेकिन पूरी कहानी थोड़ी उलझी हुई है। यानी यह नई पीढ़ी लापरवाह नहीं है, बस इसका पैसा संभालने का तरीका अलग है।



कमाई भी, खर्च भी पर किसी भी झांसे में आने से बचना होगा
यह पीढ़ी एक साथ कमाई भी कर रही है, खर्च भी कर रही है, निवेश भी कर रही है और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश भी कर रही है। शायद यह पहली ऐसी पीढ़ी है जो कम उम्र में ही कमाई, सीखने और निवेश- तीनों काम एक साथ कर रही है। यह पीढ़ी पैसों को लेकर जिज्ञासु है, ऑनलाइन दुनिया को समझती है और अवसरों को जल्दी पहचानना जानती है। लेकिन सोशल मीडिया से प्रभावित होने वाली इस दुनिया में जल्दी पैसा कमाने और सही तरीके से संपत्ति बनाने के बीच संतुलन बनाना अभी भी इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि यह पीढ़ी सिर्फ खर्च करने वाली पीढ़ी बनकर रह जाएगी या फिर भारत की सबसे ज्यादा पैसों के प्रति जागरूक और समझदार पीढ़ी के रूप में अपनी पहचान बनाएगी।
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