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कैनन इवेंट, लोकल लोर से रूम रॉटिंग तक: Gen Z के ये 9 ट्रैवल ट्रेंड्स, जो बदल देंगे आपके घूमने का अंदाज

Wed, 24 Jun 2026 11:52 AM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Gen Z के लिए यात्रा अब सिर्फ नई जगहें देखने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक सुकून, आत्म-खोज और नए अनुभवों का माध्यम बन गई है। यही वजह है कि रूम रॉटिंग, माइक्रो-वेकेशन, लोकल लोर हंटिंग और व्हाय-केशन जैसे ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आइए जानते हैं कि यह है इन शब्दों का मतलब।
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विस्तार
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अगर आपको लगता है कि छुट्टियों का मतलब ज्यादा से ज्यादा जगह देखना, तस्वीरें खींचना और एक लंबी चेकलिस्ट पूरी करना है, तो नई पीढ़ी की सोच इससे काफी अलग है। Gen Z के लिए यात्रा अब सिर्फ घूमने-फिरने का जरिया नहीं, बल्कि खुद को बेहतर महसूस करने, तनाव से दूर जाने और नए अनुभव जुटाने का माध्यम बन गई है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यात्रा से जुड़े कई नए शब्द तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आइए समझते हैं कि आखिर इनका मतलब क्या है।

1. रूम रॉटिंग (Room Rotting): कहीं जाकर कुछ न करना भी एक प्लान है

Gen Z के लिए हर यात्रा का उद्देश्य दर्शनीय स्थलों की दौड़ लगाना नहीं है। कई युवा जानबूझकर ऐसी जगह चुनते हैं, जहां वे बस आराम कर सकें। होटल के कमरे में समय बिताना, दोस्तों के साथ बातें करना, किताब पढ़ना, फिल्में देखना या घंटों सोना यही उनके लिए Ideal छुट्टी हो सकती है।
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आसान भाषा में: खूबसूरत जगह पर जाकर बिना किसी दबाव के आराम करना।

2. ड्राई ट्रिपिंग (Dry Tripping): पार्टी नहीं, शांति चाहिए

एक समय था जब छुट्टियों को नाइट लाइफ और पार्टी से जोड़ा जाता था। लेकिन अब कई युवा भीड़भाड़ और शोर से दूर रहना चाहते हैं। पहाड़ों में टहलना, जंगलों में समय बिताना, गांवों की सादगी महसूस करना और प्रकृति के बीच सुकून तलाशना उनकी पहली पसंद बन रहा है।

आसान भाषा में: शोरगुल छोड़कर सुकून भरी छुट्टियां मनाना।

3. माइक्रो-वेकेशन (Micro-cation): छोटा ब्रेक, बड़ा असर

युवा साल में एक बड़ी छुट्टी का इंतजार नहीं करते। काम या पढ़ाई से थकान महसूस हुई नहीं कि दो-तीन दिन का छोटा ट्रिप प्लान हो जाता है। ऐसे छोटे सफर मानसिक ताजगी देने का काम करते हैं।

आसान भाषा में: कुछ दिनों का छोटा सफर, जो दिमाग को तरोताजा कर दे।

4. साइड-क्वेस्टिंग (Side-Questing): असली मजा रास्ते में है

कभी किसी अनजान ढाबे पर रुक जाना, किसी छोटी गली में घूम आना, रास्ते में दिखी किसी दिलचस्प जगह को देखने निकल जाना, ये सब साइड-क्वेस्टिंग कहलाता है। इसमें मंजिल से ज्यादा महत्व उन छोटे-छोटे अनुभवों का होता है जो सफर के दौरान मिलते हैं।

आसान भाषा में: यात्रा के दौरान अचानक मिलने वाले अनुभवों का आनंद लेना।

5. डी-इन्फ्लुएंस्ड ट्रैवल (De-influenced Travel): जहां सब जा रहे हैं, वहां नहीं जाना

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जगहें अब हर किसी को आकर्षित नहीं करतीं। कई युवा ऐसी जगहों की तलाश करते हैं, जहां भीड़ कम हो और कुछ नया देखने को मिले। उनके लिए किसी अनजान जगह को खोज लेना, किसी ट्रेंडिंग डेस्टिनेशन पर जाने से ज्यादा रोमांचक है।

आसान भाषा में: भीड़ से अलग और कम चर्चित जगहों की तलाश करना।

6. लोकल लोर हंटिंग (Local Lore Hunting) : शहर नहीं, उसकी असली कहानी जानना

बड़े-बड़े पर्यटन स्थलों से आगे बढ़कर अब युवा किसी शहर की रोजमर्रा की जिंदगी को समझना चाहते हैं। स्थानीय बाजारों में घूमना, छोटी दुकानों पर जाना, वहां के लोगों से बातचीत करना और उनकी संस्कृति को करीब से देखना इस ट्रेंड का हिस्सा है।

आसान भाषा में: किसी जगह की असली पहचान और संस्कृति को महसूस करना।

7. मेंटी-बी ट्रैवल (Menty B Travel) : जब जिंदगी भारी लगे, तो निकल पड़ो

कभी-कभी यात्रा की योजना किसी जगह को देखने के लिए नहीं, बल्कि खुद को संभालने के लिए बनाई जाती है। काम का दबाव, पढ़ाई का तनाव या निजी परेशानियां बढ़ जाएं तो कई युवा कुछ दिनों के लिए कहीं दूर चले जाते हैं ताकि मानसिक रूप से खुद को बेहतर महसूस कर सकें।

आसान भाषा में: तनाव से राहत पाने के लिए की गई यात्रा।

8. व्हाय-केशन (Why-cation) : पहले भावना, फिर गंतव्य

इस सोच में लोग पहले यह तय करते हैं कि वे क्या महसूस करना चाहते हैं, शांति, रोमांच, स्वादिष्ट भोजन, प्रकृति या नई संस्कृति। उसके बाद उस अनुभव के मुताबिक जगह चुनी जाती है।

आसान भाषा में: मन की जरूरत के हिसाब से यात्रा चुनना।
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9. कैनन इवेंट (Canon Event) : वह सफर जो आपको बदल दे

कभी किसी यात्रा में हुई एक मुलाकात, कोई अप्रत्याशित अनुभव या कोई सीख आपकी सोच बदल देती है। Gen Z ऐसे ही पलों को 'कैनन इवेंट' कहती है। ये वे अनुभव होते हैं जो लंबे समय तक याद रहते हैं और जिंदगी को देखने का नजरिया बदल देते हैं।

आसान भाषा में: ऐसा पल जो आपको पहले जैसा नहीं रहने देता।

आखिर Gen Z चाहती क्या है?

अगर इन सभी ट्रेंड्स को एक साथ देखें, तो साफ दिखाई देता है कि नई पीढ़ी परफेक्ट छुट्टियां नहीं, बल्कि सच्चे अनुभव तलाश रही है। उनके लिए यात्रा अब तस्वीरों और चेकलिस्ट से आगे बढ़कर भावनाओं, यादों और आत्मिक संतुष्टि का हिस्सा बन चुकी है।
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