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Dating Trend: क्रश तो है पर बात आगे बढ़ाने का मन नहीं! क्या है Gen Z का Crush Recession?

Fri, 09 Oct 2026 07:22 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Gen Z को किसी पर क्रश तो होता है, लेकिन रिश्ते की मेहनत से बचने का मन करता है। रिजेक्शन का डर, ओवरथिंकिंग और इमोशनल ड्रामा के बीच फीलिंग्स को दिल में रखना आसान लगता है। यानी क्रश में इंटरेस्ट है, लेकिन उसे पाने के लिए एफर्ट्स लगाने का मन नहीं! यही है Gen Z का Crush Recession।
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जेन जी की डेटिंग लाइफ - फोटो : Ai
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विस्तार
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किसी पर क्रश है, उसकी स्टोरी भी देखते हो, मैसेज का इंतजार भी रहता है, लेकिन बात शुरू करने या रिश्ते को आगे बढ़ाने की एनर्जी नहीं है? तो Gen Z के इस नए इंटरनेट ट्रेंड को समझो। इसे 'Crush Recession' कहा जा रहा है। यानी किसी को पसंद तो करना, लेकिन उस फीलिंग को रिश्ते में बदलने का मन न होना। ऐसा नहीं है कि Gen Z को प्यार नहीं चाहिए, बस अब सवाल ये है कि क्या किसी को पसंद करने के बाद आने वाली ओवरथिंकिंग, रिजेक्शन का डर और इमोशनल ड्रामा सच में झेलने लायक है?

क्रश के साथ इतनी ओवरथिंकिंग क्यों?

आज किसी नए इंसान से जुड़ना बस एक स्वाइप जितना आसान है, लेकिन किसी के साथ सच में कनेक्ट करना उतना ही मुश्किल लग सकता है। मैसेज का रिप्लाई देर से क्यों आया? उसने ऐसा क्यों कहा? वो सीरियस है भी या नहीं? और ये रिश्ता आखिर जा कहां रहा है? इन सवालों के बीच एक छोटा-सा क्रश भी सिरदर्द बन सकता है।

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पहले किसी को पसंद करना एक पर्सनल फीलिंग थी, लेकिन अब सोशल मीडिया के दौर में ऐसा लग सकता है कि हर छोटी बात नोटिस की जा रही है। Gen Z को प्यार और कनेक्शन तो चाहिए, लेकिन हर समय अपनी फीलिंग्स को समझाने और रिश्ते को संभालने का प्रेशर थका सकता है।

डेटिंग यानी पैसे और इमोशन्स, दोनों का खर्च

डेट पर जाना जेब पर भारी पड़ सकता है, वहीं किसी के साथ सिचुएशनशिप में रहना दिमाग पर। सामने वाला क्या सोच रहा है, रिश्ता किस दिशा में जा रहा है और कहीं रिजेक्शन तो नहीं मिलने वाला, इन सबके बीच इमोशनल एनर्जी भी खर्च होती है। इसके साथ आर्थिक अनिश्चितता और दुनिया भर की परेशानियां भी युवाओं के लिए तनाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में कई बार सवाल यह नहीं होता कि क्रश अच्छा है या नहीं, बल्कि यह होता है कि उसके बाद आने वाली पूरी कहानी संभालने का मन है भी या नहीं।

डेटिंग से ब्रेक क्यों ले रहे हैं लोग?

किन्से इंस्टीट्यूट और मैच के 5,000 सिंगल लोगों पर किए गए सर्वे में डेटिंग से जुड़ी थकान को लेकर ये आंकड़े सामने आए।

  • 53% लोगों ने डेटिंग से थक जाने की बात कही।
  • 46% लोगों ने खुद को रिचार्ज करने के लिए डेटिंग से ब्रेक लिया।
  • 63% लोगों ने महसूस किया कि अब वे किसी से बातचीत शुरू करने या पहला कदम उठाने में पहले से ज्यादा हिचकिचाते हैं।

क्रश है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने का मन क्यों नहीं?

क्रश रिसेशन का मतलब यह नहीं है कि Gen Z को प्यार में दिलचस्पी नहीं रही। बल्कि किसी को पसंद करने और उसके साथ रिश्ता शुरू करने के बीच एक बड़ा अंतर महसूस हो सकता है। किसी की प्रोफाइल देखना, उसकी स्टोरी पर नजर रखना और उसके मैसेज का इंतजार करना आसान है, लेकिन अपनी फीलिंग्स बताना और सामने वाले के जवाब का सामना करना मुश्किल लग सकता है।

डेटिंग एप्स पर नए लोगों से मिलने के कई विकल्प हैं, लेकिन बार-बार नई बातचीत शुरू करना और हर बार रिश्ते के आगे बढ़ने की उम्मीद रखना थका सकता है। कभी बात आगे नहीं बढ़ती, कभी सामने वाला अचानक बातचीत बंद कर देता है और कभी रिश्ता बिना किसी नाम के चलता रहता है। ऐसे में कुछ लोग अपनी फीलिंग्स जाहिर करने के बजाय इंतजार करना पसंद करते हैं। वे चाहते हैं कि सामने वाला पहले कदम उठाए, ताकि उन्हें रिजेक्शन का सामना न करना पड़े। यही वजह है कि किसी को पसंद करने के बावजूद वे रिश्ते को आगे बढ़ाने से बच सकते हैं। क्रश रिसेशन इसी स्थिति को दिखाता है, जहां किसी के लिए फीलिंग्स तो हैं, लेकिन उन्हें रिश्ते में बदलने की कोशिश करने का मन नहीं है।

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