नीलिमा इस धनतेरस पर अपने पुराने कंगन को बदलकर सोने के नए कंगन लेना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने कई दुकानों से जानकारी इकट्ठा की लेकिन कहीं भी उन्हें अपने पुराने कंगन की अनुमानित कीमत के मुताबिक दाम नहीं मिला। चूंकि उनके कंगन हॉलमार्क नहीं थे इसलिए उनकी शुद्धता के बारे में कई जौहरियों ने अलग-अलग बातें बताईं जिनपर विश्वास करना उनके लिए तो संभव नहीं ही था। हारकर उन्होंने पुराने कंगन बदलकर नए कंगन लेने का विचार ही छोड़ दिया।
नीलिमा जैसे कई लोग हैं जो गहनों की खरीदारी या एक्सचेंज की प्रक्रिया में कई बार कुछ जरूरी पहलुओं पर ध्यान नहीं देते और बाद में उन्हें एहसास होता है कि वे ठगे गए। ऐसे में 'नोटनदास ज्वेलर्स' के सीनियर सेल्स एक्सिक्यूटिव मेहुल सोनी द्वारा बताए गए इन पहलुओं पर जरूर गौर करें जिससे ज्वेलरी खरीदते वक्त आप आपकी खरीदारी 'वैल्यू फॉर मनी' कहलाए।
शुद्धता में समझौता नहीं
गहना चाहे किसी मेटल का हो या फिर किसी स्टोन का, उसकी शुद्धता के पैमाने अलग-अलग होते हैं। खासतौर पर सोने के ज्वेलरी खरीदते वक्त उसकी शुद्धता की जांच बेहद जरूरी है। पहले सोने के गहनों की शुद्धता की जांच के लिए छोटे जौहरी कैरोमीटर का इस्तेमाल करते थे लेकिन यह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड की कसौटी पर खरा नहीं माना जाता है।
आजकल सोने के लिए बीआईएस 916 हॉलमार्क को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शुद्धता का पैमाना माना जाता है जिसमें यह गारंटी होती है कि सोना 91.6 प्रतिशत खरा है यानी 22 कैरट है। इसी प्रकार हीरे के काम वाला गहना 18 कैरट का ही अधिकतर बाजार में मिलता है। तो कोशिश करें कि हीरे के जड़ाऊ गहनों में सोने की शुद्धता 18 कैरट ही हो।
व्हाइट गोल्ड और रोडियम फिनिश
आजकल व्हाइट गोल्ड का चलन जोरों पर है। कई बार लोग व्हाइट गोल्ड की चाह में रोडियम की पॉलिशिंग वाले येलो गोल्ड को ही व्हाइट गोल्ड समझकर ले आते हैं। व्हाइट गोल्ड निकल, चांदी और दूसरे मेटल के साथ मिलाकर बनाया जाता है जिससे उसका रंग प्राकृतिक रूप से सफेद होता है। वहीं सोने पर रोडियम से पॉलिश करके उसे सफेद लुक भी देते हैं जो छह से सात महीने तक बरकरार रहती है। पॉलिशिंग से सोने का न सिर्फ सफेद रंग देते हैं बल्कि हरा और मेटालिक रंग भी दिया जा सकता है।
प्लैटिनम की खरीद
प्लैटिनम प्राकृतिक रूप से सफेद फिनिशिंग का होता है और इसकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है। आजकल लोगों का झुकाव प्लैटिनम की हल्की ज्वेलरी जैसे रिंग, ईयररिंग्स, ब्रेसलेट आदि की ओर बढ़ा है लेकिन इसके एक्सचेंज और रीसेल वैल्यू में दिक्कत हो सकती है। अधिकतर जगहों पर अब भी प्लैटिनम को लोग लेने से हिचकिचाते हैं क्योंकि इसकी बिक्री कम है। चूंकि प्लैटिनम की चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है इसलिए इसे एक्सचेंज भी लोग कम ही करते हैं।
मेकिंग चार्ज
मेकिंग चार्ज अलग-अलग गहनों के मुताबिक अलग-अलग होता है जिसे ज्वेलर्स सोने के गहने बनाने के मेहनताने के रूप में देखा जाता है। ऐसे में ज्वेलरी खरीदते वक्त अलग-अलग जगहों के मेकिंग चार्ज की जानकारी जरूर ले लें जिससे आपके गहने की कीमत में कम से कम मेकिंग चार्ज हो और सोना या मेटल अधिक हो।
वेस्टेज चार्ज
अक्सर सोने के गहनों को एक्सचेंज करते वक्त कई बार कुछ ज्वेलर उनपर वेस्टेज चार्ज भी लगा देते हैं। आमतौर पर यह मानते हैं कि सोने के गहनों को दूसरे गहने में बदलते वक्त कुछ हिस्से का नुकसान होता है लेकिन जौहरी इसे वापस निकाल लेते हैं। ऐसे में वेस्टेज चार्ज को सावधानीपूर्वक समझकर ही अपने गहने को एक्सचेंज करें।
हॉलमार्क चार्ज
हॉलमार्क टेस्टिंग के लिए भी ज्वेलरी खरीदते वक्त आपको चार्ज देना पड़ेगा क्योंकि हॉलमार्क टेस्टिंग के अलग से चार्ज लगते हैं। कई बार ज्वेलर्स हॉलमार्क की निर्धारित कीमत से अधिक चार्ज करते हैं। तो आप बाजार में इसकी जानकारी लेकर ही डील फाइनल करें।
फेस्टिव ऑफर्स
कई बार फेस्टिव ऑफर्स की चकाचौंध में हम यह समझने में गलती कर बैठते हैं कि वाकई उस ऑफर में कितनी छूट है। कुछ जगहों पर सोने या मेटल की कीमत में छूट देकर उसकी भरपाई मेकिंग चार्ज आदि से भी कर ली जाती है तो ऑफर के बारे में अच्छे से जानकारी के बाद ही ज्वेलरी फाइनल करें।