इसके अलावा आप समय-समय पर कपड़ों को देखती भी रहेंं। लेदर के बने कपड़ों को उस स्थान पर सुरक्षित रखें, जहां वातावरण थोड़ा ठंडा और अच्छी तरह हवादार है। इसे साफ सुथरे सफेद मलमल के कपड़े से लपेटकर रखें। लेदर के कपड़ों को सफेद टिशू पेपर के साथ गद्देदार बनाकर फ्लैट रखना चाहिए। यदि कपड़ों को टांगने की आवश्यकता है, तब सफेद टिशू पेपर के साथ गद्दी बनाकर सफेद मलमल के कपड़े से इसे ढक दें। बुने और रेशम के कपड़ों को हमेशा फ्लैट ही रखें। यदि आपको लगता है कि इन कपड़ों को टांगना होगा, तब अच्छी तरह साफ करके सफेद टिशू पेपर को कपड़ों के अंदर लगाकर मलमल के कपड़े से लपेटकर रख दें।
शॉल्स को ऐसे करें स्टोर
कश्मीरी और पश्मीना शॉल को एयरटाइट जिप लगे पॉलीथीन के बैग में पैक करें, ताकि उनमें किसी प्रकार की नमी और सिल्बरफिश चीटियां न लगें। इसके अलावा पश्मीना शॉल को नेफ्थलीन बॉल्स के साथ नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इनकी गंध यह सोख लेती है। रेशम का बना स्कार्फ और शॉल्स को मलमल के कपड़ों में लपेटकर गद्देदार हैंगर्स में टांगना चाहिए। शॉल्स और स्टोल्स के बीच में सूखी नीम की पत्तियों को भी रख सकती हैं। हमेशा शॉल को साफ करने के बाद उसे अच्छी तरह से सुखा लें, क्योंकि इनमें आसानी से सलवटें पड़ जाती हैं।
फर वाले कोट या लेदर जैकेट्स को अगर सही तरीके से न रखें, तो नमी की वजह ये शीघ्र ही खराब होने लगते हैं। नमी के कारण लेदर को सुखाना पड़ता है, जिससे लेदर में दरार आने लगती है। इसलिए इसे ड्राईक्लीन कराना ही सही रहता है। फर वाले कोट की पैकिंग ठीक से करें। इन्हें कॉटन के बैग में रखें न कि प्लास्टिक के बैग में, क्योंकि फर को बाहरी हवा की जरूरत होती है। प्रत्येक तीन माह में कोट को बैग से बाहर निकालें और साथ ही उसमें लगी धूल आदि को साफ कर लें।