सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक उग्र भीड़ को देखा जा सकता है।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके संभल में हुई हिंसा से जोड़ा जा रहा है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद में अदालत के आदेश पर किए गए सर्वेक्षण के विरोध में हुए लाठीचार्ज हुआ है।
सुमित (@sumit45678901) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “भारत इस्लामी आक्रामकता की एक और लहर का सामना कर रहा है उत्तर प्रदेश के संभल में, एक विशाल इस्लामी भीड़ ने अदालत द्वारा आदेशित सर्वेक्षण को रोकने के लिए आतंक फैलाया, जिसमें दावा किया गया था कि जामा मस्जिद को ध्वस्त किए गए हरि हर मंदिर, एक पवित्र हिंदू मंदिर के ऊपर बनाया गया था।”
Aapkampmanishpareek's नाम को एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा “संभल में जामा मस्जिद सर्वे पर भड़का बवाल, संभल में समझाती रही पुलिस लेकिन नहीं माने पत्थरबाज, पत्थरबाजी करने वालों पर पुलिस लेगी कड़ा एक्शन, डीजीपी बोले- की जा रही पहचान।”
पड़ताल
इस मामले की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें एक
फेसबुक अकाउंट पर हाल में वायरल हो रहा वीडियो मिला। इस वीडियो को 2019 में पोस्ट किया गया था। यह उत्तर प्रदेश में CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के विरोध के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का वीडियो बताया गया था।
इस खबर के बारे में सच जानने के लिए हमने
अमर उजाला उत्तर प्रदेश के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें पता चला कि यह घटना 20 दिसंबर 2019 की है। यहां से हमें वीडियो दिख रही कुछ तस्वीरें भी मिलीं। खबर में बताया गया था कि अलग-अलग गलियों से निकलते हुए बेकाबू भीड़ नखास चौक पहुंच गई। नखास चौक में पुलिस कम थी, इसी का फायदा उठाकर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस पर भी पथराव कर दिया। नखास की एक गली में पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जबरदस्त पथराव किया और आगे बढ़ने की चेतावनी भी दी। पुलिस ने उपद्रवियों को गली के अंदर खदेड़ा।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो 2019 का जिसे हाल का बताकर शेयर किया जा रहा है।