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Fact Check: फलस्तीनी फुटबॉल खिलाड़ियों के यूरोपीय दौरे का वीडियो स्वीडन भागने के दावे के साथ किया जा रहा शेयर

Tue, 15 Jul 2025 08:38 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कुछ बच्चे जहाज में बैठे हैं। दावा किया जा रहा है कि गाजा के लोग स्वीडन भाग रहे हैं। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला है।  

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक हवाई जहाज में कुछ बच्चे एक तरह की यूनिफॉर्म पहने नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह बच्चे फ़िलिस्तीनी हैं और स्वीडन भाग रहे हैं। आपको बता दें इस समय हमास और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच फलस्तीन में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

अमर उजाला ने अपनी पड़ातल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि ये बच्चे शरणार्थी नहीं हैं, बल्कि वेस्ट बैंक, फलस्तीन स्थित रावहेल चैरिटी एसोसिएशन की अंडर-14 फुटबॉल टीम के सदस्य हैं। वे यूरोप के 46 दिनों के दौरे पर हैं, जिसमें फ्रांस, स्वीडन, डेनमार्क और नॉर्वे शामिल हैं। 

क्या है दावा 

इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि गाजावासी स्वीडन भाग चुके हैं। बाकी लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे गाजा छोड़कर भाग जाएं। 

Betar Worldwide (@Betar_USA) नाम के एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा “गाज़ावासियों के स्वीडन पहुंचने की बहुत अच्छी खबर! हम सभी से जल्द से जल्द गाजा छोड़कर फलस्तीन से भागने का आग्रह करते हैं।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

इस तरह के कई और दावों की लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

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पड़ताल 

इस वीडियो की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो को कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें वीडियो तो नहीं मिला लेकिन जहाज में बैठे लोगों की कई और तस्वीर मिली। यह तस्वीर रावहेल चैरिटी एसोसिएशन नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की गईं थीं। इस अकाउंट के बारे में प्रोफाइल में लिखा गया था कि यह एक  गैर-लाभकारी चैरिटेबल संगठन, फलस्तीनी बच्चों के बीच फुटबॉल का विकास, 2016 में लाइसेंस प्राप्त और स्थापित, फिलिस्तीन, पश्चिमी तट, तुलकरेम


 

 

आगे हमें इसके बारे में पता लगाया तो हमें पता चला कि यह एक पश्चिमी तट के तुलकरेम में स्थित एक लाइसेंस प्राप्त गैर-लाभकारी संस्था है, तथा इसका उद्देश्य फुटबॉल में बच्चों, फलस्तीनी शरणार्थी शिविरों के बच्चों और फलस्तीनी समाज में हाशिए पर रहने वाले लोगों की खेल प्रतिभा को निखारना है, जो कठिन जीवन स्थितियों से पीड़ित हैं।

 

इसी इंस्टाग्राम अकाउंट पर हमें वायरल वीडियो में दिख रहे बच्चे और कोच की एक तस्वीर शेयर की गई मिली। इस तस्वीर को शेयर करके लिखा गया था “रावहेल चैरिटी एसोसिएशन के नायकों की पेरिस सेंट-जर्मेन क्लब की यात्रा से। गो रावहेल”

 

 

आगे हमें कीवर्ड के माध्यम से सर्च करने पर द नेशनल पर इससे जुड़ी एक रिपोर्ट मिली।  द नेशनल की स्थापना 2008 में हुई थी, जिसने मध्य पूर्व में पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि रावाहेल चैरिटी एसोसिएशन के अंडर-14 लड़के यूरोप के 46 दिनों के दौरे पर निकले हैं, जिसमें फ़्रांस, स्वीडन, डेनमार्क और नॉर्वे शामिल हैं। वे तीन स्कैंडिनेवियाई टूर्नामेंटों में 25 से ज़्यादा मैचों की तैयारी के लिए एक प्रशिक्षण शिविर के लिए पेरिस पहुंचे हैं।

 

पड़ताल का नतीजा 

हमारी पड़ताल में यह साफ है कि युवा फलस्तीनी फुटबॉल टीम के वीडियो को गाजा छोड़कर स्वीडन भागने का दावा गलत है। 

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