भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लौट चुकी हैं। उनके साथ बैरी विलमोर भी नौ महीने बाद धरती पर लौट आए हैं। इसे लेकर अब सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट शेयर की जा रही है।
क्या है दावा
एक पोस्ट शेयर किया जा रहा है जिसमें सुनीता विलियम्स और बैरी विलमोर नजर आ रहे हैं। इस पोस्ट में लिखा गया है कि नासा के अंतरिक्ष यात्री 8 दिन के मिशन के गलत हो जाने के बाद 9 महीने में पहली बार आधिकारिक तौर पर पृथ्वी पर उतरे। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि ऐसा लग नहीं रहा है कि वे नौ महीने फंसे रहने के बाद वापस आए हैं। इसी के साथ नासा पर तंज भी किया जा रहा है।
फ्लैट अर्थ ज़ोन (@FlatEarthZone) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “अंतरिक्ष यात्री 9 महीने तक अंतरिक्ष में ‘फंसे’ रहे, फिर भी वे अपने कैप्सूल से बाहर निकले और चेहरे पर ताजगी और मुस्कान लिए हुए थे। मांसपेशियों में कोई कमी नहीं, किसी पुनर्वास की ज़रूरत नहीं - बस सीधे प्रेस टूर पर चले गए। स्टूडियो नासा में रहना बहुत आरामदायक रहा होगा।” (
पोस्ट का आर्काइव लिंक)
पॉल्सकॉर्नर-वर्सक्वेस्ट (@TNTJohn1717) नाम के एक एक्स यूजर ने इस पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा “अंतरिक्ष के कठोर शून्य में नौ महीने फंसे रहने के बाद भी वे ऐसे दिखते हैं जैसे वे अभी-अभी किसी डे स्पा से निकले हों कोई मांसपेशी शोष नहीं, कोई पुनर्वास नहीं, बस मुस्कुराहट और प्रेस टूर। या तो नासा के पास ब्रह्मांड का सबसे अच्छा शून्य-गुरुत्वाकर्षण जिम है, या स्टूडियो नासा के पास पृथ्वी पर सबसे अच्छी ग्रीन स्क्रीन है!” (
पोस्ट का आर्काइव लिंक)
पड़ताल
दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सुनीता विलयम्स के धरती पर वापस लौटने की कई रिपोर्ट देखी। यहां हमें
बीबीसी की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें दोनों को अपने पैरों पर स्पेस क्राफ्ट से नहीं निकले बल्कि उन्हें स्ट्रेचर पर बाहर निकाला गया।
शेयर किए गए पोस्ट पर दिख रही तस्वीर हमें बहुत पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट की हुई मिली। गूगल रिवर्स इमेज से सर्च करने पर हमें
द मिरर पर इस तस्वीर को 1 जुलाई 2024 को अपनी एक रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया था। इस रिपोर्ट का शीर्षक था “अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी 90 दिनों तक टल सकती है, क्योंकि बोइंग स्टारलाइनर को ठीक करने में संघर्ष कर रहा है।”
पृथ्वी पर आईएसएस के मुकाबले माहौल काफी अलग है। दरअसल, अंतरिक्ष का माहौल जीरो ग्रैविटी वाला होता है। यानी यहां अंतरिक्ष यात्री एक कदम में कई फीट की दूरी पूरी कर लेते हैं। इतना ही नहीं कई मौकों पर तो उन्हें स्पेसशिप पर घंटों पैर भी नहीं रखना पड़ता। ऐसे में ठोस सतहों पर उनके पैरों की दबाव डालने की क्षमता कम हो जाती है और उनके पैरों में मौजूद मांसपेशियों का मोटा हिस्सा कम होता है। सुनीता विलियम्स और बैरी विलमोर को इसलिए स्ट्रेचर पर वापस धरती पर लाया गया।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि सुनीता विलियम्स और बैरी विलमोर अपने पैरों पर चलकर धरती पर वापस नहीं लौटे हैं।