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Fact Check: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और किंग चार्ल्स के नमाज पढ़ने की तस्वीर फर्जी, पढ़ें पड़ताल

Tue, 11 Mar 2025 07:55 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और किंग चार्ल्स की एक तस्वीर वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि यूके में इस्लाम का  दबदबा बढ़ रहा है। 
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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और किंग चार्ल्स की एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर में दोनों नमाज पढ़ते हुए नजर आ रहे हैं। 
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क्या है दावा 
इस तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि जा रहा है कि गजवा ए यूरोप, इस तरह आप सॉफ्ट जिहाद के जरिए किसी देश पर कब्जा कर लेते हैं। तस्वीर को शेयर करके ब्रिटेन को इस्लामी देश बनने का दावा किया जा रहा है। 

एआई स्वेअरेंजेन (@LarryWa01884739) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “ब्रिटेन एक इस्लामिक राज्य में तब्दील हो चुका है, बहुसंस्कृतिवाद पश्चिमी देशों के इस्लामीकरण से कम नहीं है, महान प्रतिस्थापन” 
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सुमित कालरा (@sumit1kalra) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “लंदन के मेयर एक मुस्लिम हैं, बर्मिंघम के मेयर एक मुस्लिम हैं, लीड्स के मेयर मुस्लिम हैं, ब्लैकबर्न के मेयर - मुस्लिम, शेफ़ील्ड का मेयर एक मुस्लिम है, ऑक्सफोर्ड के मेयर एक मुस्लिम हैं, ल्यूटन के मेयर एक मुस्लिम हैं, ओल्डम के मेयर मुस्लिम हैं, रोसडेल के मेयर मुस्लिम हैं। और यह सब इंग्लैंड के 66 मिलियन लोगों में से केवल 4 मिलियन मुसलमानों द्वारा हासिल किया गया है। आज इंग्लैंड में 1800 से अधिक मस्जिदें हैं, 80 से अधिक शरिया अदालतें हैं, 50 से अधिक सीरिया परिषदें हैं, 78 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं काम नहीं करतीं, उन्हें राज्य सहायता + मुफ़्त आवास मिलता है। सिर्फ महिलाएं ही क्यों, मुसलमानों का एक बड़ा प्रतिशत काम नहीं करता है और उन्हें राज्य समर्थन + मुफ़्त आवास प्राप्त होता है। औसतन 3 से 8 बच्चों वाले राज्य समर्थित मुस्लिम परिवारों को मुफ्त आवास मिलता है। अब, यूके के प्रत्येक स्कूल को इस्लाम के बारे में पाठ पढ़ाना आवश्यक है।” 
इसी तरह के कई और दावे आप यहां और यहां देख सकते है। 

पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वायरल तस्वीर को ध्यान से देखा। तस्वीर में हमें ग्रुक का वॉटरमार्क दिखा। ग्रुक एक्स का एक एआई टूल है। इस टूल से किसी की भी तस्वीर को बनाया जा सकता है। 

आगे हमने फोटो को हाइव मॉडरेशन का उपयोग करके विश्लेषण करने की कोशिश की। जो AI द्वारा उत्पन्न दृश्यों का पता लगाने का उपकरण है। हाइव से पता चला कि तस्वीर में AI द्वारा उत्पन्न या डीपफेक सामग्री होने की 99.4% संभावना है।



इससे ये पता चलता है कि तस्वीर को एआई की मदद से जनरेट किया गया है, असल में इस तरह की कोई भी घटना यूके में नहीं हुई है। 

पड़ताल का नतीजा 
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि फोटो को एआई के माध्यम से बनाया गया है। 
 
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