सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। वीडियो में महिलाओं की भीड़ को हाथ में मोमबत्ती लेकर चलते हुए देखा जा सकता है।
क्या है दावा
इस वीडियो को मणिपुर का बताकर शेयर किया जा रहा है। मणिपुर में कुकी-मीतेई समुदायों के बीच चल रहे विवाद के बीच मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि मणिपुर के निवासी “भारत से आज़ादी की घोषणा करने के बाद” मशाल जुलूस निकाल रहे थे। इस मार्च का हाल ही में होने का दावा किया जा रहा है।
जिमी (@backtime) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “मणिपुर के भारत से स्वायत्त राज्य घोषित होने और अब देश का हिस्सा न होने के बाद, मणिपुर बहुसंख्यक ईसाई क्षेत्र बन गया है। मणिपुर में कई जगहें हैं जहां लोग भारत से आज़ादी के लिए मार्च कर रहे हैं।” (
पोस्ट का आर्काइव लिंक)
मुज़्ज़मल (@Warrior1Pak) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “मणिपुर भारत आजादी के लिए लड़ रहा है। बलूचिस्तान में खेलना बंद करो वरना जल्दी ही मणिपुर और भी बन जाएगा।”(
पोस्ट का आर्काइव लिंक)
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें
एक जिज्ञासा है (@EkSawalMaiKaru) नाम के एक एक्स अकाउंट पर यह वीडियो 12 सितंबर 2024 को पोस्ट मिला। इस वीडियो को पोस्ट करके कैप्शन लिखा गया था “शासन-जब प्रशासन इतना ख़राब है तो राज्यपाल और मुख्यमंत्री झक मारने के लिए कुर्सी पर बैठे हैं...?? ना जाने कब इस राज्य की तरह हमारे राज्य का भी ये हाल हो जाए...!!”
इस वीडियो की आगे जांच करने के लिए हमने वीडियो को कीवर्ड के माध्यम से सर्च किया। कीवर्ड से सर्च करने पर हमें
इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट की वेबसाइट पर इसी तरह के विजुअल के साथ एक खबर मिली। 09 सितंबर 2024 को छपी इस खबर से हमें पता चला कि मणिपुर में चल रहे संघर्ष को हल करने में सरकार की निष्क्रियता पर जनता की निराशा को दर्शाने के लिए 9 सितंबर को थांगमेइबंद और आसपास के इलाकों के मीरा पैबिस ने मशाल रैली निकाली। यह विरोध प्रदर्शन शांति के लिए एक और आह्वान है, क्योंकि राज्य 16 महीने से अधिक समय से चल रहे संकट से जूझ रहा है। प्रदर्शनकारी THAU ग्राउंड में एकत्र हुए और लगभग 10 किलोमीटर तक मार्च किया, जानबूझकर राजभवन और मुख्यमंत्री के आवास जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से बचते रहे। प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर की एकता का आह्वान करते हुए और सरकार से शांति बहाल करने का आग्रह करते हुए अपनी मांगों को व्यक्त करते हुए नारे लगाए। मुख्य नारे थे, "मणिपुर को विघटित मत करो", "हम शांति चाहते हैं" और "मणिपुर अमर रहे।"
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो सितंबर 2024 का है जिसे हाल में भ्रामक दावों के साथ शेयर किया जा रहा है।