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Fact Check: किसान नेता राकेश टिकैत का पुराना वीडियो हाल का बताकर वायरल, जानें पड़ताल में वीडियो की सच्चाई

Mon, 09 Sep 2024 09:01 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: राकेश टिकैत पर हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो हाल ही का है। हमारी पड़ताल में पता चला कि वीडियो करीब दो साल पुराना है।
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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसान आंदोलन का चेहरा रहे राकेश टिकैत का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि राकेश मीडिया को संबोधित कर रहे होते हैं उसी समय एक व्यक्ति वहां पहुंच कर उनके ऊपर कुछ फेंक देता है। 
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क्या है दावा 
इस वीडियो को सोशल मीडिया एक्स पर शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि हाल ही में किसान नेता राकेश टिकैत को किसी ने बेल्ट से मारा क्योंकि वो कुछ दिन पहले अल्लाह हू अकबर के नारे लगा रहे थे। 

जय हिंद जय भारत जय श्री राम… (@tutorial_o) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा “राकेश टिकैत की पिटाई”
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आनंद तीर्थ (@anandathirtharb) नाम के एक एक्स अकाउंट ने वीडियो के साथ लिखा “एक अदिनांकित वीडियो में एक असली किसान नकली किसान राकेश टिकैत को बेल्ट से पीटता हुआ दिखाई दे रहा है। कुछ दिन पहले राकेश टिकैत को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए सुना गया था..@RakeshTikaitBKU #कर्नाटक में आपका स्वागत है।”
जय_शिवाजी_जय (@Jai_Shivaji_Jai) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “इंटरनेट पर यह वीडियो आया। क्या यह सच है और यह कब हुआ। #राकेश टिकैत (नकली किसान) को #असली किसान ने पीटा।
पड़ताल 
वीडियो को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर एक यूट्यूब का लिंक मिला यहां इस वीडियो को 2022 में शेयर किया गया था। इससे ये साफ हो गया कि ये वीडियो पुराना है। जिसे अब वायरल किया जा रहा है। 

इस वीडियो के बारे में अधिक जानने के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। अमर उजाला ने इस घटना पर 30 मई 2022 को खबर छापी थी। खबर के मुताबिक कर्नाटक की राजधानी बंगलूरु में किसान नेता राकेश टिकैत के ऊपर स्याही फेंकी गई। प्रेस वार्ता के दौरान धक्का मुक्की के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया। इसके बाद राकेश टिकैत के समर्थकों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई भी कर दी थी। खबर में ये भी बताया गया कि स्थानीय किसान नेता चंद्रशेखर के समर्थकों ने स्याही फेंकी थी। 

पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो करीब दो साल पुराना है और इसमें धार्मिक नारे लगाने का कोई मसला नहीं था। वीडियो के जरिए अभी भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। 
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