सोशल मीडिया एक्स पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में बड़ें के गोल आकार में लोहे का एक पदार्थ जमीन पर गिरा हुआ है और उसके आसपास लोग नजर आ रहे हैं।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि केन्या की धरती पर आकाश से गिरी धातु की वस्तु को इसरो से जोड़कर शेयर किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के डॉकिंग प्रयोग, स्पैडेक्स से 500 किलोग्राम की गोलाकार धातु की वस्तु केन्या में गिरने पर भारत को मुआवजा देना चाहिए।
सिटी डाइजेस्ट (@city_digest) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “केन्या सरकार भारत से मुआवजा मांग रही है, उसका तर्क है कि धातु के गिरने से मकुएनी के लोगों की जान जोखिम में पड़ गई क्योंकि यह धातु गिरने के समय बहुत गर्म थी और इसका वजन 500 किलोग्राम तक था। (
पोस्ट का आर्काइव लिंक)
कॉर्नेलियस के. रोनोह (@itskipronoh) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “केन्या ने भारत को मकुएनी काउंटी में गिरे रॉकेट के मलबे के लिए मुआवजे की मांग के बारे में सूचित किया है, जिससे लोगों की जान को खतरा है। कासोंगो भी इसके लिए उत्सुक है।” (
पोस्ट का आर्काइव लिंक)
इस तरह के कई और दावे आप
यहां और
यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने हमने दावे के कुछ कीवर्ड को इंटरनेट पर खोजने की कोशिश की। यहां हमें
बीबीसी की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि “केन्या की अंतरिक्ष एजेंसी के विशेषज्ञ 500 किलोग्राम वजन के धातु के छल्ले की जांच कर रहे हैं जो सोमवार को धरती पर गिरा था।
यह राजधानी नैरोबी से 50 किमी (31 मील) दक्षिण-पूर्व में मुकुकु गांव पर गिरा किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
केन्या अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि उसके शुरुआती आकलन से पता चला है कि यह विशाल वस्तु "लॉन्च वाहन (रॉकेट) से अलग होने वाला छल्ला" था।
आगे कहा कि इन्हें "आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करते ही जलने या समुद्र जैसे खाली क्षेत्रों में गिरने के लिए डिज़ाइन किया जाता है"।
इस खबर में हमें ये कहीं भी पता नहीं चला कि इस घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया है। केन्या स्पेस एजेंसी की तरफ से अभी इस मामले में जांच चल रही है।
आगे हमें एक्स पर केन्या स्पेस एजेंसी का भी इस मामले पर बयान मिली। स्पेस एजेंसी की तरफ से कहा गया कि “वस्तु के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है, तथा मलबे और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) या किसी विशिष्ट अंतरिक्ष मिशन के बीच कोई आधिकारिक संबंध का पता नहीं चला है। एजेंसी और अन्य संबंधित अधिकारी गहन जांच कर रहे हैं।”
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि दावा भ्रामक है। केन्या ने भारत को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।