हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने गए थे। रूस के कज़ान में BRICS सम्मेलन के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर की जा रही है।
क्या है दावा
इस पोस्ट को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि भारत ने तुर्की की ब्रिक्स सदस्यता की कोशिश को अस्वीकार कर दिया। क्योंकि तुर्की के पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध है।
प्रियंका एम मिश्रा (@soulfulgirlll) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के कारण तुर्की की ब्रिक्स सदस्यता की बोली को अस्वीकार कर दिया। इसे "नेतृत्व" कहा जाता है।”
डॉ. पूर्णिमा (@PoornimaNimo) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के कारण तुर्की की ब्रिक्स सदस्यता की बोली को अस्वीकार कर दिया। आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता। चाड मोदी जी !!”
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने इंटरनेट पर कीवर्ड के माध्यम खबर को सर्च करने की कोशिश की। यहां हमें कई
मीडिया रिपोर्ट मिला जिसमें इस दावे को गलत बताया गया था।
हमें
बिल्ड पर भी इसी मुद्दे से जुड़ी एक रिपोर्ट मिली। बिल्ड या बिल्ड-ज़ीटुंग एक्सल स्प्रिंगर एसई द्वारा प्रकाशित एक जर्मन टैब्लॉयड अखबार है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने तुर्की की ब्रिक्स सदस्यता को अस्वीकार कर दिया।
आगे हमें
सिनान उलगेन का इस रिपोर्ट को लेकर एक बयान मिला, उलगेन तुर्की के पूर्व राजनयिक थे। उन्होंने कहा “मैंने ब्रिक्स के बारे में बिल्ड को एक साक्षात्कार दिया, लेकिन समाचार में बारीकियां शामिल नहीं थीं। भारत तुर्की से दूर जरूर है, लेकिन इस पर वीटो करने की जरूरत नहीं है. इस मुद्दे पर मतदान नहीं हुआ. भारत के अलावा कई अन्य देश तेजी से विस्तार के खिलाफ हैं। उस मुद्दे पर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।”
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि भारत ने ब्रिक्स में तुर्की की सदस्यता के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया दावा भ्रामक है।