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Fact Check: 2018 की पुलिस भर्ती में सीने पर जाति लिखने की घटना को अभी का बताकर किया जा रहा शेयर

Mon, 05 May 2025 07:39 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इसमें देखा जा सकता है कि दो युवकों के सीने पर जातिसूचक शब्द लिखे हैं। इस फोटो को अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है। हमारी पड़ताल में ये तस्वीर सात साल पुरानी निकली है। 

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर में दो युवक दिखा दे रहे हैं। उनके सीने पर पेन से एससी और एसटी लिखा गया है। घटना मध्यप्रदेश की बताई जा रही है। इस तस्वीर को शेयर करके कहा जा रहा है कि एक भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों के साथ यह हरकत की गई है। दावा किया जा रहा है कि भाजपा की सरकार इस तरह से दलितों का अपमान करती है। कहा जा रहा है कि संघ-भाजपा की सोच है जो आदिवासी-दलितों को आज भी नीचा दिखाना चाहती है। अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। पड़ताल में पता चला कि यह घटना सात वर्ष पुरानी है। इस घटना को हालिया बताकर शेयर करके भ्रामक दावा किया जा रहा है। जांच में पता चला कि तस्वीर 2018 की है। धार में जिला पुलिस और विशेष सशस्त्र बल में भर्ती होने वाले 300 से अधिक जवानों की मेडिकल जांच के दौरान इस घटना के होने की जानकारी पड़ताल में पता चली। 

 हाल ही में केंद्र सरकार ने जाति जनगरणा कराने का एलान किया है। इसकी जानकारी अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी थी। इसके बाद यह तस्वीर शेयर की जा रही है। 1931 के बाद पहली बार, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अलावा, देश की हर जाति का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। 
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क्या है दावा 
इस तस्वीर को शेयर करके दवा किया जा रहा है कि भाजपा और आरएसएस के लोग दलितों का अपमान करते हैं। भर्ती के समय अभ्यर्थियों के सीने पर उनकी जाति लिख दी है। 

डॉ.विक्रांत भूरिया (@VikrantBhuria) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “SC-ST होना अब गुनाह है क्या? मध्य प्रदेश में भर्ती अभ्यर्थियों के सीने पर ‘SC-ST’ लिखकर जाति की पहचान करवाई गई। ये सिर्फ़ इंक नहीं है—ये संघ-भाजपा की सोच है जो आदिवासी-दलितों को आज भी नीचा दिखाना चाहती है। ये घटना नहीं, संविधान की हत्या है!” इस दावे का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी आप नीचे देख सकते हैं।

  इसी तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 
  पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने तस्वीर के बारे में अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें पता चला कि मामला अप्रैल 2018 का है। 30 अप्रैल 2018 को प्रकाशित खबर हमें मिली। खबर में बताया गया था कि “मध्य प्रदेश में कॉन्स्टेबलों की भर्ती के दौरान के बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां उम्मीदवारों के मेडिकल टेस्ट के दौरान उनके सीने पर एससी-एसटी लिख दिया गया। मामला बढ़ने पर जहां अफसरों ने सफाई देना शुरू कर दिया है तो वहीं गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं।” 

  धार के सीएमएचओ डॉ. आरसी पनिका ने इस बारे में सफाई देते हुए कहा कि ये अल्फाबेट अस्पताल के ही किसी अधिकारी ने लिखे हैं। उन्होंने प्राथमिक जांच के आधार पर ये बात बताई। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अधिकारी ने ऐसा किसके कहने पर किया है। सीएमएचओ ने आगे कहा कि इस मामले की जांच डॉ. केसी शुक्ला और डॉ. एस पटेल को सौंपी गई है। प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि दीपक नाम के अधिकारी ने ऐसा किया है। इसके अलावा सिविल सर्जन एसके खरे ने बताया कि एससी-एसटी कोई एक जाति न होकर एक पूरा समूह है। उन्होंने कहा ये दिखाने का उद्देश्य जाति दिखाना नहीं बल्कि आरक्षित वर्ग दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वहीं एसपी बीरेंद्र सिंह का कहना है कि मामले की जांच अभी चल रही है। प्रथम जांच में यह सामने आया है कि वहां मेडिकल चेकअप वाले अभ्यर्थियों की संख्या अधिक थी जिस कारण ऐसा किया गया होगा।  

पड़ताल का नतीजा  

हमारी पड़ताल में यह साफ है कि 2018 की घटना को अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है। तस्वीर को हालिया बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है। 

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