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Fact Check: दो अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों को अभी की बताकर किया जा रहा शेयर

Thu, 22 Jan 2026 08:02 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम लोगों की भीड़ ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को तोड़ दिया है। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है।

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अखबार की कटिंंग की तस्वीर वायरल हो रही है। खबर में दो तस्वीरें लगी हैं। इन तस्वीरों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की टूटी हुई मूर्ति नजर आ रही है। तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम लोगों की भीड़ ने अंबेडकर की मूर्ति तोड़ी है। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल तस्वीरों में नजर आ रही खंडित मूर्तियां सात साल पुरानी हैं। इसके साथ ही यह दोनों अलग-अलग घटना से जुड़ी हैं। 

क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों के साथ लगी एक खबर की तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है मुस्लिम लोगों की भीड़ ने डॉक्टर अंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी। 

पुष्पराज शर्मा (@RealPushprajX) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, ”देवरिया में मुस्लिमों की भीड़ ने अंबेडकर की मूर्ति को तोड़ दिया। दलितों को पीटा। और मुख्य आरोपी रहमत अली ने घर में घुसकर दलित किशोरी से छेड़छाड़ की। लेकिन अपना चंदू चंद्र शेखर आजाद किधर है अभी तक एक शब्द नहीं निकला उसके मुंह से। जय भीम जय मीम।'' पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां  देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां  देख सकते हैं।

पड़ताल

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले पहली तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें एक्स पर नंद लाल मौर्य नाम के यूजर के अकाउंट पर वायरल कटिंग देखने को मिली। यह पोस्ट 17 नवंबर 2020 को साझा किया गया है। 

यहां से पता चला कि यह मामला हालिया नहीं है। आगे की पड़ताल में के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 21 अप्रैल 2019 को प्रकाशित की गई है। यह रिपोर्ट वायरल कटिंग से मिलती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि घर में घुसकर किशोरी से छेड़खानी करने के विरोध पर कुछ लोगों ने शुक्रवार की रात अनुसूचित जाति की बस्ती में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। किशोरी और उसके घरवालों की पिटाई की। बस्ती में लगी आंबेडकर प्रतिमा तोड़ दी। पिटाई से करीब 20 लोग जख्मी हुए हैं। घटना गौरीबाजार के महुअवां गांव की है। पीड़ितों ने थाने पहुंचकर हंगामा किया। केस दर्ज कराने और प्रतिमा की मरम्मत की मांग को लेकर गुस्से का इजहार किया। घटना से गांव में तनाव की स्थिति है। 

 

यहां से पता चलता है कि पहली तस्वीर 2019 की उत्तरप्रदेश की है। जिसे अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है। 

इसके बाद हमने दूसरी तस्वीर की पड़ताल की। इस दौरान हमें  न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 17 अप्रैल 2019 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में हमें वायरल तस्वीर देखने को मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भीम राव अंबेडकर की 128वीं जयंती से एक दिन पहले पंजागुट्टा में अंबेडकर की प्रतिमा को गिराए जाने के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। कई दलित संगठनों ने प्रतिमा को बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन किए। वहीं, मदिगा आरक्षण पोराटा समिति (एमआरपीएस) ने बुधवार को इंदिरा पार्क में भूख हड़ताल का आह्वान किया है।

 

इसके बाद हमें डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 14 अप्रैल 2019 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती समारोह से एक दिन पहले, जीएचएमसी के कर्मचारियों ने पंजागुट्टा में बिना अनुमति के स्थापित नेता की प्रतिमा को हटा दिया और कथित तौर पर कचरा ढोने वाले ट्रक का उपयोग करके उसे जवाहरनगर के डंप यार्ड में फेंक दिया। प्रतिमा रास्ते में टूट गई। यह प्रतिमा दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी की प्रतिमा के बगल में स्थापित की जानी थी, जिसके लिए भी अनुमति नहीं ली गई है।

 

पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल वायरल तस्वीर को दो अलग-अलग घटनाओं का पाया। इसके साथ ही यह सात साल पुरानी है।

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