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Fact Check: दक्षिण अफ्रीका में नौ साल पहले हुई घटना को सूडान का बताकर संप्रदायिक दावे के साथ किया जा रहा शेयर

Tue, 04 Nov 2025 11:22 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर की जा रही कि जिसमें एक अश्वेत शख्स को जबरन ताबूत में बंद किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि सूडान में  इस्लामिक चरमपंथी ईसाई समुदाय के शख्स के साथ ऐसा कर रहे हैं। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला। 

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक अश्वेत शख्स को जबरदस्ती ताबूत में बंद किया जा रहा है। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि सूडान में इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा ईसाई समुदाय के शख्स को ताबूत में जिंदा दफनाने की कोशिश की जा रही है। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमें इस तस्वीर से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट 2016 में प्रकाशित मिली। इस रिपोर्ट से पता चला कि यह वीडियो दक्षिण अफ्रीका में वर्ष 2016 में हुए नस्लीय हमले की घटना का है। इस सांप्रदायिक दावे के साथ सूडान का बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है। 

क्या है दावा 

 अश्वेत शख्स को जिंदा ताबूत में बंद करने के एक वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि सूडान में इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा ईसाई समुदाय के शख्स को ताबूत में जिंदा दफनाने की कोशिश की जा रही है। 

नितिन शुक्ला नाम के एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा, ‘सूडान में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा निर्दोष ईसाइयों को जिंदा दफनाया जा रहा है, दुनिया के हर कोने में सिर्फ एक ही समुदाय को दिक्कत क्यों है?’ पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

 

  इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें इस वीडियो से जुड़ी कई मीडिया रिपोर्ट मिलीं, जिसमें पता चला कि यह घटना 2016 में घटी थी। अलजजीरा की एक रिपोर्ट से पता चला कि यह घटना अगस्त 2016 में हुई थी। दो गोरे किसानों ने  इलाके में रहने वाले बेरोज़गार विक्टर म्लोथशवा को एक ताबूत में बंद करने की कोशिश की थी। 

  रेडियो फ्रांस इंटरनेशनेल ने एफपी के हवाले से इस खबर को छापते हुए लिखा था, “दो गोरे साउथ अफ्रीकी किसानों को बुधवार को मारपीट के आरोप में थोड़ी देर के लिए कोर्ट में पेश किया गया। एक वीडियो में उन्हें एक अश्वेत आदमी को ताबूत में धकेलते और उसे ज़िंदा जलाने की धमकी देते हुए दिखाया गया था। विलेम ओस्टहुइज़न और थियो मार्टिंस जैक्सन, दोनों 28 साल के हैं, उन्हें हिरासत में भेज दिया गया। इन दोनों पर 27 साल के विक्टर म्लोत्शवा को किडनैप करने और मारपीट करने का आरोप था। यह घटना अगस्त में म्पुमलंगा के पूर्वी प्रांत में मिडलबर्ग शहर के पास एक फार्म में हुई थी।

 

 

 

पड़ताल का नतीजा 

 हमारी पड़ताल में यह साफ है कि घटना 2016 में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। इसे अभी का बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है। 
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