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Fact Check: नेपाल के आठ महीने पहले के वीडियो को ईरान से जोड़कर किया जा रहा शेयर, पढ़ें पड़ताल

Mon, 19 Jan 2026 08:04 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि तेहरान में हजारों लोग भाग रहे हैं। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। 

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग पहाड़ के रास्ते से जाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के दखल की आशंका से ईरान के हजारों लोग राजधानी से भाग रहे हैं। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो करीब आठ महीने पुराना और नेपाल का है। 

क्या है दावा

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ईरान की राजधानी तेहरान से लोग पहाड़ों के रास्ते भाग रहे हैं। 

 

 

नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “  ईरान तेहरान के हजारों निवासी राजधानी छोड़कर जान बचाने के लिए पहाड़ों पर चढ़ रहे हैं। ईरानी अपनी आजादी के लिए जी-जान से लड़ रहे हैं और फारस के 'शाह' रजा पहलवी की वापसी चाहते हैं। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

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इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें madeinnepal143 नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 2 जून 2025 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि हर साल, रूपा पाटन समेत डोलपा के ऊंचे इलाकों में दुर्लभ और बहुमूल्य औषधीय कवक यारसागुम्बा की कटाई के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। "हिमालयी सोना" के नाम से मशहूर यारसागुम्बा 3,000 से 5,000 मीटर की ऊंचाई पर पनपता है और इसके कथित स्वास्थ्य लाभों के लिए इसे बहुत महत्व दिया जाता है। डोलपा और पड़ोसी जिलों जैसे रुकुम, जाजरकोट और जुमला के ग्रामीण इन पहाड़ी मैदानों की कठिन यात्राएं करते हैं, अस्थायी शिविर लगाते हैं और हफ्तों तक कठोर परिस्थितियों का सामना करते हैं। यारसागुम्बा की कटाई से होने वाली आय बहुत महत्वपूर्ण है, जो अक्सर परिवारों का पूरे साल का गुजारा करती है। हालांकि, इस काम में कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें ऊंचाई पर होने वाली बीमारी और अप्रत्याशित मौसम शामिल हैं, जो आर्थिक जीविका की तलाश में इन समुदायों के सामने आने वाले जोखिमों को उजागर करती हैं। 

आगे की पड़ताल में  हमें Dolpa नाम के फेसबुक अकाउंट पर वायरल वीडियो से संबंधित क्लिप देखने को मिली। यह वीडियो 29 मई 2025 को साझा किया गया है। इसके साथ ही लिखा है कि लोग यार्चा गुम्बा, रूप पाटन, डोल्पा जिला एकत्र कर रहे हैं।

 

 

आगे की पड़ताल के लिए हमने कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 24 मई 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पर्वतीय जिले डोलपा में यार्सागुम्बा (ओफियोकोर्डिसेप्स साइनेंसिस) की कटाई का मौसम आते ही कक्षाएं शांत हो जाती हैं। छात्र, उनके माता-पिता और यहां तक कि शिक्षक भी इस बहुमूल्य कवक को खरीदने के लिए पहाड़ी घास के मैदानों की ओर निकल पड़ते हैं। मानसून के मौसम से पहले, मई और जून के बीच यारसागुम्बा की कटाई की जाती है। इस दौरान सुदूरपश्चिम, करनाली और गंडकी प्रांतों के कई जिलों में हिमालय की तलहटी में हजारों लोग इस कवक को इकट्ठा करने के लिए उमड़ पड़ते हैं। यारसागुम्बा इस क्षेत्र के कई परिवारों के लिए आय का मुख्य स्रोत है। यह 3,540 से 5,500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है।

 

पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को नेपाल का पाया है। इसका ईरान के मौजूदा संकट से कोई संबंध नहीं है। 

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