अरावली के पहाड़ों को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसका विरोध हो रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अरावली शृंखला के 100 मीटर से ऊपर के पहाड़ों को ही पहाड़ माना जाएगा। इस फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया जा रहा है। राजस्थान की अलग-अलग जगाहों पर इसको लेकर आंदोलन हो रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, इस वीडियो में लाखों लोगों की भीड़ मैदान में नजर आ रही है। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि अरावली को बचाने के लिए लाखों लोगों की भीड़ राजस्थान में आंदोलन कर रही है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि वीडियो में किसी तरह की कोई सच्चाई नहीं है। इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। यह वीडियो आरावली के किसी आंदोलन से जुड़ा नहीं है। वीडियो इंटरनेट पर अगस्त से मौजूद है। दरअसल वीडियो राजस्थान के दौसा जिले के महवा के करिड़ी खानपुर में हुए एक रेसलिंग टूर्नामेंट के दौरान का है।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि अरावली पर्वत को बचाने के लिए राजस्थान में लाखों लोगों की भीड़ आंदोलन कर रही है।
Momaji_ka_ladla नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट से इस वीडियो को शेयर करके लिखा गया, “अरावली पर्वत की तरफ देखा भी सरकार ने तो पूरा राजस्थान, सड़को पर उतरेगा” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें यह वीडियो gurdeep_pahalwan_gopalgarh नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो 31 अगस्त को शेयर किया गया था। इस पोस्ट में लिखा गया था “राजस्थान का सबसे बड़ा दंगल करीरी खानपुर,महवा”

हमने यहां से कुछ संकेत लेकर कीवर्ड के माध्यम से गूगल पर सर्च किया। यहां हमें जगत तक न्यूज नाम के एक यूट्यूब चैनल पर एक कुश्ती का वीडियो मिला। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया था “टोडाभीम: करीरी गाजीपुर कुश्ती दंगल | आखिरी बालों से तो ये ही अच्छे लड़े” इस वीडियो को यहां 31 अगस्त को शेयर किया गया था। इस वीडियो में भी लोग वायरल वीडियो के जैसे नीले रंग की दिवारों पर बैठे हुए नजर आ रहे थे।


जांच के दौरान पता चला कि वीडियो अगस्त से इंटरनेट पर मौजूद है साथ ही एक कुश्ती के दौरान का है। वहीं अरावली का मामला 21 नवंबर के बाद शुरू हुआ है।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो को भ्रामक दावे की साथ अरावली आंदोलन से जोड़कर शेयर किया जा रहा है।