सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो वायरल हो रहा है वीडियो में देखा जा सकता है कि एक दुर्गा पंडाल में दुर्गा माता की मूर्ति का हाथ टूटा हुआ है। वीडियो में पूजा का सामान जैसे फल और फूल भी बिखरे हुए नजर आ रहे हैं।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो हैदराबाद का है। इस वीडियो को सांप्रदायिक एंगल के साथ शेयर किया जा रहा है। एक्स पर यूजर दावा कर रहे हैं कि माता दुर्गा की मूर्ति को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वरा तोड़ा गया है।
रमेश तिवारी (@rameshofficial0) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो शेयर करके लिखा “यह पाकिस्तान नहीं बल्कि कांग्रेस शासित तेलंगाना हैदराबाद है। मोहब्बत की दुकान में मां दुर्गा के लिए जगह नहीं है। मगर नमाज पढ़ सकते है और चुनो कांग्रेस को। हैदराबाद में अपमानजनक मां दुर्गा की मूर्ति तोड़ी गई।”
इक्विटी डायवर्सिटी (@EquityDivercity) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “बांग्लादेश या पाकिस्तान नहीं। यह हैदराबाद है। जिहादियों द्वारा दुर्गा माता की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया। अरे हिंदुओं, सोते रहो। आप बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं।”
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने खबर से जुड़े हुए कीवर्ड को सर्च किया। इस दौरान हमें न्यूज एजेंसी एएनआई की एक्स पर एक ट्वीट मिला। एएनआई के मुताबिक “हैदराबाद के बेगम बाजार पुलिस स्टेशन की सीमा में नामपल्ली प्रदर्शनी मैदान में एक दुर्गा पूजा पंडाल का दृश्य, जहां अज्ञात व्यक्तियों ने हुंडी (दान पेटी) को एक तरफ कर दिया, जिससे देवी दुर्गा की मूर्ति का हाथ गिर गया। मूर्ति को अब ठीक कर दिया गया है।
एएनआई के एक्स अकाउंट पर हमें पुलिस का बयान मिला “सेंट्रल जोन के डीसीपी अक्षेश यादव ने कहा, "सुबह करीब 6:00 बजे हमें फोन आया कि प्रदर्शनी मैदान में रखी गई दुर्गा माता की मूर्ति का दाहिना हाथ टूट गया है और मूर्ति के चरणों में रखा प्रसाद और अन्य सामान बिखरा हुआ है। टीम तुरंत सुबह मौके पर पहुंची और सबूतों की तलाश की, हमने सीसीटीवी फुटेज चेक की और करीब 8:15 पर हमने एक आरोपी को पकड़ा। आरोपी का नाम कृष्णैया गौड़ है, वह एक आवारा है, वह सुबह भूख लगने के कारण इस पंडाल में आया था और भोजन की तलाश करते समय उसने प्रसादम को हिला दिया और उसमें मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई। यह घटना आयोजकों की ओर से लापरवाही के कारण हुई... हमने आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।"
अक्षेश यादव की तरफ से ये भी कहा गया कि कुछ लोग इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहें है उन्हें पहले तथ्यों की थोड़ी जांच कर लेनी चाहिए।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि मूर्ति तोड़ने के मामले में कोई सांप्रदायिक रंग नहीं है।