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Fact Check: 42 करोड़ में बने ब्रिज को 52 करोड़ में तोड़ने का दावा भ्रामक, पड़ताल में जानें वायरल दावे का सच

Mon, 16 Sep 2024 08:13 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक दावा किया जा रहा है जिसमें कहा जा रहा है कि गुजरात के हाटकेश्वर फ्लाईओवर को बनाने में 42 करोड़ रुपए लगे लेकिन उसको तोड़ कर गिराने में 52 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर गुजरात के अहमदाबाद से जुड़ा हुआ एक दावा वायरल हो रहा है। इस दावे में हाटकेश्वर फ्लाईओवर की बात हो रही है। यहां पर फ्लाईओवर को तोड़ने में लगे पैसों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। 
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क्या है दावा 
सोशल मीडिया पर एक पोस्टर को शेयर किया जा रहा है, इस पोस्टर में लिखा है “अहमदाबाद के इस हाटकेश्वर फ्लाईओवर को 42 करोड़ की लागत से 2017 में बनाया गया था और 100 सालों तक इसके टिकने की आशा की गई थी। लेकिन 2022 में ही इसकी मजबूती पर सवाल खड़े होने के बाद अब इसे 52 करोड़ रुपए की लागत से गिराया जाएगा।”
लोग दावा कर रहे है कि फ्लाईओवर के बनने से ज्यादा पैसे इसे तोड़ने में लग रहे है। इसमें भ्रष्टाचार चरम पर है। 

अनवर अली (@Anwar_Hyd_) नाम के एक एक्स यूजर ने पोस्टर को शेयर करके लिखा “गुजरात मॉडल - भ्रष्टाचार चरम पर - 52 करोड़ में गिराई जा सकने वाली संरचना बनाने में 44 करोड़ खर्च किए, चुना लगा जनता को 96 करोड़ का लेकिन लेकिन लेकिन, आएगा तो _ _ _ _ हाय हाय हाय”
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भारतजोड़ो  (@independence2_0) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “गुजरात मॉडल, निर्माण लागत- 44 करोड़, गिराने की लागत- 52 करोड़”
पड़ताल 
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले कुछ कीवर्ड के साथ इस खबर के बारे में पता करने की कोशिश की। वहां से हमें पता चला कि इस दावे के बारे में गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने एक्स पर कुछ जानकारी दी है। 

गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के एक्स पर दिए गए बयान के अनुसार “पुराने पुल को ध्वस्त करने और नए पुल के निर्माण की संयुक्त लागत 52 करोड़ रुपये है। नए पुल के निर्माण की राशि को पुराने पुल के ठेकेदार से वसूला जाएगा।”



आपको बता दें 2017 में अजय इंफ्रा नाम की एक कंपनी ने इस ब्रिज को बनाया था। ब्रिज निर्माण के पांच साल बाद ही इसकी मजबूती पर सवाल खड़े होने लग गए जिसके बाद स्टेबिलिटी टेस्ट में भी ये फेल हो गया। इसके बाद ब्रिज बनाने वाली अजय इंफ्रा कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। अब इस ब्रिज के पुननिर्माण में आने वाला खर्च अजय इंफ्रा से वसूला जाएगा। 

पड़ताल का नतीजा 
हमारी पड़ताल में यह दावा कि 42 करोड़ में ब्रिज को 52 करोड़ में तोड़ा गया, भ्रामक निकला। यह साफ है कि ये खबर भ्रामक तरीके से फैलाई जा रही है। 






 
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