सोशल मीडिया में आंध्र प्रदेश को लेकर एक दावा वायरल हो रहा है। आंध्र प्रदेश सरकार के उस फैसले को लेकर दावा किया जा रहा है, जिसमें सरकार ने वक्फ बोर्ड की मौजूदा कमेटी को भंग करने का आदेश दिया है।
क्या है दावा
इस खबर के साथ दावा किया जा रहा है कि आंध्र प्रदेश ने राज्य में वक्फ बोर्ड को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। कई लोग ये भी दावा कर रहे हैं कि राज्य में वक्फ बोर्ड को बैन कर दिया गया है।
ʀᴀᴊᴀ ꜱᴀᴀʙ.... (@Baahubali230) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “आंध्र प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड पर भी प्रतिबंध लगा दिया, राज्य सरकार द्वारा लिया गया सबसे अच्छा निर्णय।” (
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नीलेश जोशी (@Dreamachiever_9) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “तुम चर्चा करते रह गए....और दोनों ने धीरे से वक्फ बोर्ड को खत्म कर दिया। आंध्र सरकार ने राज्य में वक्फ को खत्म कर दिया है। ये पवन नहीं आंधी है आंधी। (
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इसी तरह के कई और दावे आप
यहां और
यहां देख सकते है।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने
अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें पता चला कि आंध्र प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। चंद्रबाबू नायडू सरकार ने पिछली जगन मोहन सरकार द्वारा गठित वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया है। आंध्र के कानून और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एन. मोहम्मद फारूक ने कहा कि इस संबंध में आदेश शनिवार को जारी किए गए। आंध्र प्रदेश सरकार अब एक नए वक्फ बोर्ड का गठन करेगी। नई सरकार ने पिछले प्रशासन द्वारा जारी जीओ-47 को रद्द करते हुए जीओ-75 जारी किया।
30 नवंबर के आदेश में राज्य सरकार ने कहा है कि वाईएसआरसी शासन द्वारा गठित एपी राज्य वक्फ बोर्ड लंबे समय से (मार्च 2023 से) निष्क्रिय है। उस समय गठित वक्फ बोर्ड में कुल 11 सदस्य थे, जिनमें से तीन निर्वाचित थे और बाकी आठ मनोनीत थे। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 नवंबर, 2023 को राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के चुनाव पर रोक लगा दी थी, क्योंकि बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की गई थी।
यहां से हमें पता चला कि सरकार ने पुरानी सरकार के द्वारा गठित किए गए बोर्ड को भंग करके नया बोर्ड बनाने का फैसला लिया है। इसके आगे हमें आंध्र प्रदेश सरकार का बयान भी मिला। इसमें गलत खबरों पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया गया कि एक नए बोर्ड का गठन किया जाएगा। आंध्र प्रदेश सरकार का पूरा बयान आप
यहां पढ़ सकते है।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि सरकार के फैसले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।