16 अगस्त 2025 को देशभर में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इसी को लेकर अब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि कुछ पुलिस अधिकारी एक कतार में बंदरों को बैठाकर खाना खिला रहे हैं। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर वाराणसी के घाटों पर पुलिस की निगरानी में बंदरों को खाना खिलाया जा रहा है। इसे असली घटना का वीडियो बताकर शेयर किया जा रहा है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वायरल वीडियो किसी असली घटना का नहीं है; यह AI के द्वारा बनाया गया है। डीपफेक या AI द्वारा बनाई गई सामग्री में पाई जाने वाली कई विसंगतियां वीडियो में देखी जा सकती हैं। इसके अलावा, Hive जैसे AI कंटेंट डिटेक्शन टूल्स से भी वायरल वीडियो को AI द्वारा बनाए जाने का पता चला है।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर वाराणसी के घाटों पर पुलिस की निगरानी में बंदरों को खाना खिलाया गया।
ठा. प्रदीप कुमार सिंह (@4Pradeepthakur) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर करके लिखा “बहुत सुंदर नजारा वाराणसी घाट पर जन्माष्टमी पर वानर सेना को भोजन जय श्री राम” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक आप
यहां और
यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप
यहां और
यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें यह वीडियो कई सोशल मीडिया अकाउंट पर इसी दावे के साथ पोस्ट मिला। इससे जुड़ी कोई भी मीडिया रिपोर्ट हमें देखने को नहीं मिली। वायरल वीडियो की बारीकी से जांच करने पर, कई विसंगतियां नजर आईं।
पुलिस अधिकारियों और बंदरों की हरकतें अस्वाभाविक और अवास्तविक लग रही थीं। उदाहरण के लिए, एक पुलिस अधिकारी राइफल और झंडा दोनों पकड़े हुए दिखाई दे रहा है। ऐसी विसंगतियाँ आमतौर पर AI द्वारा बने हुए वीडियो में पाई जाती हैं।
यह पता लगाने के लिए कि क्या वायरल वीडियो AI के द्वारा बनाया गया है, हमने cantilux टूल्स का उपयोग करके इसका विश्लेषण किया। cantilux ने वीडियो के AI द्वारा बने होने की 71% संभावना जताई है।
आगे हमने undetectable AI टूल पर इस वीडियो को सर्च किया। यहां इस वीडियो के पूरी तरह से एआई से बने होने के बारे में पता चला और केवल 2% ही असली होने की जानकारी मिली।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो को एआई के माध्यम से बनाया गया है। इसमें किसी भी तरह की कोई सच्चाई नहीं है।