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विचार: तकनीक के साथ नई युवा संस्कृति

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सीएम योगी और यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी (दाएं से बाएं) - फोटो : X @CMOfficeUP
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जापान के औद्योगिक दर्शन को समझाने के लिए एक शब्द बहुत इस्तेमाल किया जाता है और वह है- काइजन। यह जापानी भाषा के दो अक्षरों 'काई' (परिवर्तन) और 'जेन' (अच्छाई) से मिलकर बना है। शाब्दिक अर्थ है- "बेहतरी के लिए परिवर्तन।“ यह हर कार्यस्थल पर, हर कर्मचारी द्वारा किए जाने वाले छोटे-छोटे, निरंतर सुधारों की एक जीवनशैली है जो जापान को अनुशासन, सटीकता और तकनीकी उत्कृष्टता का पर्याय बनाती है और अब यामानाशी प्रांत के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश ने भी ऐसी ही विशिष्टता हासिल करने की ओर कदम बढ़ाया है।
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यूपी-यामानाशी प्रांत की साझेदारी में भूगोल, नीति और अवसर एक साथ एक ही बिंदु पर खड़े दिखाई देते हैं। एक ओर जापान है, जिसने काईजन का आदर्श सूत्र अपनाकर द्वितीय विश्व युद्ध के मलबे से उठकर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था खड़ी की। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश है, 24 करोड़ से अधिक आबादी वाला, युवाओं से भरा और महत्वाकांक्षाओं से लबरेज राज्य, जो एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का स्वप्न देख रहा है। यह सटीकता और संभावना का मिलन है, जो एक बड़े लक्ष्य की नींव है।

उच्च तकनीकः सेमीकंडक्टर से सप्लाई चेन तक 
जापान की पहचान वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर, स्वचालन (ऑटोमेशन) और हरित ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में निर्विवाद नेतृत्वकर्ता की रही है। यह संयोग नहीं है कि उत्तर प्रदेश में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा का क्षेत्र आज इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के एक सशक्त क्लस्टर के रूप में उभर रहा है। यदि जापानी दिग्गज कंपनियां यहां सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, असेंबली इकाइयों और माइक्रो-चिप डिजाइनिंग में निवेश करती हैं, तो यह एक संपूर्ण, आत्मनिर्भर सप्लाई चेन के निर्माण की शुरुआत होगी जो कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की पूरी प्रक्रिया को राज्य की सीमाओं के भीतर समेट लेगी। इससे न केवल प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, बल्कि सैकड़ों सहायक (एंसिलरी) इकाइयां भी जन्म लेंगी, जो स्थानीय उद्यमिता को नई ऊर्जा देंगी।

सतत विकासः हरित ऊर्जा और गतिशीलता 
नेट-जीरो के लक्ष्य में जापान की ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक और इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी समाधान एक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उत्तर प्रदेश, जो पहले से ही अपने ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, इन तकनीकों का लाभ उठाकर एक बड़ी छलांग लगा सकता है। इसी तरह औद्योगिक स्वचालन, रोबोटिक्स और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में जापान की विशेषज्ञता स्थानीय विनिर्माण इकाइयों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों तक ले जाने में मददगार साबित हो सकती है। यीडा क्षेत्र में समर्पित जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस और दूरदर्शी कदम है, जो उच्च-तकनीक आधारित एमएसएमई और सहायक उद्योगों के लिए एक संपूर्ण, एकीकृत इकोसिस्टम प्रदान करेगी।
 

कौशल विकास: तकनीक से पहले हाथों का हुनर
जापानी कंपनियां राज्य में 'इंस्टीट्यूट फॉर मैन्युफैक्चरिंग' और 'इंस्टीट्यूट फॉर स्किल्स' जैसे विशेष प्रशिक्षण संस्थान स्थापित कर सकती हैं। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को जापानी कार्य-संस्कृति के मूल तत्व भी सिखाए जा सकते हैं। काइज़न यानी निरंतर सुधार की भावना, यदि यह दर्शन उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं के डीएनए में उतर जाए, तो राज्य का श्रमबल न केवल घरेलू, बल्कि वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सकेगा।

नवाचारः शिक्षा और उद्योग का संगम 
आईआईटी कानपुर, आईआईटी-बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ-साथ राज्यभर के आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेजों के साथ जापानी कंपनियों का सीधा जुड़ाव एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता हैॉ रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मेकाट्रोनिक्स जैसे अत्याधुनिक विषयों में विशिष्ट पाठ्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं, जो पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था और उद्योग जगत की वास्तविक जरूरतों के बीच की खाई को पाटेंगे। इसके साथ ही, तकनीकी प्रशिक्षण के समानांतर यदि जापानी भाषा और सांस्कृतिक समझ को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, तो यह उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि जापान और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी रोजगार के नए और बेहतर द्वार खोलेगा। 
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बुनियादी ढांचाः निवेश के लिए तैयार जमीन
बड़े निवेश के लिए सबसे पहली शर्त होती है भरोसेमंद और आधुनिक बुनियादी ढांचा। उत्तर प्रदेश में तेजी से मजबूत होता लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे, आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना और बेहतर होती प्रशासनिक व्यवस्था इस दिशा में राज्य को एक स्वाभाविक बढ़त देती है। जापानी निवेशक, जो निर्णय लेने में सतर्कता और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए यह वातावरण अत्यंत आकर्षक है। यूपी-जापान निवेश सम्मेलन राज्य के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने में दीर्घकालिक बदलाव लाने की क्षमता रखता है। 

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक संजय शर्मा उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं।)
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