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विचार: जापान की बुजुर्ग आबादी को यूपी के 'युवा टैलेंट' का सहारा

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापान के यामानाशी प्रांत के राज्यपाल - फोटो : X (@myogiadityanath)
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उत्तर प्रदेश 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण 'यूपी-जापान हेल्थकेयर एवं हेल्थकेयर इकॉनमी पार्टनरशिप' के रूप में सामने आया है। इस समझौते के जरिए यूपी में वर्ल्ड क्लास हेल्थ सर्विसेस की नींव रखी जा रही है। इससे न केवल प्रदेश की जनता को बढ़ती बीमारियों के इलाज में बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि दुनिया भर में उत्तर प्रदेश की पहचान एक ऐसे मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में स्थापित होगी जहां इलाज वैश्विक मानकों के अनुरूप बेहद सस्ता और उच्च गुणवत्तापूर्ण होगा। यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को दुनिया में अग्रणी मेडिकल डिवाइसेस और इक्विप्मेंट्स के मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल करने जा रही है। 
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जापान की बुजुर्ग आबादी की जरूरत और यूपी की असीमित युवा शक्ति
वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब दो बिल्कुल पूरक शक्तियां आपस में मिलती हैं, तो एक अजेय विकास मॉडल का जन्म होता है। आज का जापान दुनिया की सबसे तेजी से बुजुर्ग होती आबादी वाला देश है, जहां लगभग 29 प्रतिशत से अधिक आबादी 65 वर्ष से अधिक आयु की हो चुकी है। इस भारी जनसांख्यिकीय संकट के कारण जापान में बुजुर्गों की देखभाल के लिए पेशेवर केयरगिवर्स और नर्सों की गंभीर किल्लत हो गई है। दूसरी तरफ, हमारा उत्तर प्रदेश आज अपनी विशाल आबादी और 56 प्रतिशत से अधिक कार्यशील जनसंख्या के साथ दुनिया की सबसे बड़ी युवा महाशक्तियों में से एक बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में नर्सिंग, पैरामेडिकल और अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करता है। ऐसे में, इस साझेदारी से न केवल जापान को एक विश्वसनीय और कुशल वर्कफोर्स मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च वेतन वाले सुरक्षित रोजगार हासिल होने के अवसरों का भी सृजन होगा।

इसके साथ ही, दोनों देशों के हेल्थकेयर सर्टिफिकेशन और मानकों में तालमेल बिठाने के लिए पारस्परिक मान्यता समझौतों पर भी युद्धस्तर काम चल रहा है ताकि यूपी के कॉलेजों से मिलने वाली नर्सिंग डिग्री को जापान में तुरंत मान्यता मिल सके। यह नीति सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के टैलेंट को वैश्विक मानकों पर अपग्रेड करके राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे भरोसेमंद मैनपावर हब बनाने का रोडमैप सिद्ध हो रही है।

वैश्विक विनिर्माण और 'मेक इन इंडिया' का नया महा-इकोसिस्टम
विकसित उत्तर प्रदेश-2047 का लक्ष्य तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक राज्य केवल उपभोक्ता न रहकर एक अग्रणी निर्माता न बन जाए। इसी दूरगामी सोच के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा और आधुनिक 'मेडिकल डिवाइस पार्क' और फार्मा पार्कों का नेटवर्क विकसित कर रहे हैं। ऐसे में, एक ओर जहां जापान की पहचान दुनिया भर में अपनी अत्यधिक सटीक, गुणवत्तापूर्ण और उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के लिए है। वहीं, योगी सरकार जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अपनी अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान कर रही है। इसमें प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और सुगम लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था शामिल है। इस जापानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आगमन से उत्तर प्रदेश में मेडिकल डिवाइसेस, एक्स-रे मशीन, एमआरआई स्कैनर और विभिन्न जीवन रक्षक उपकरणों का बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन शुरू होगा। इससे न केवल भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और 'मेक इन इंडिया' को बल मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश दुनिया के प्रमुख और लागत-प्रभावी विनिर्माण हब की अग्रिम पंक्ति में शामिल हो जाएगा। ऐसे में, यह कहना गलत नहीं होगा कि निश्चित तौर पर यह देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया तक का सबसे ठोस और प्रभावी कदम है।
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यूपी के चिकित्सा ढांचे का हाई-टेक भविष्य
आज की दुनिया केवल दवाओं से नहीं, बल्कि एआई और उन्नत तकनीक से चल रही है। जापान इस समय हेल्थकेयर इकॉनमी और चिकित्सा के क्षेत्र में 'पेशेंट मॉनिटरिंग एआई सिस्टम' और 'नर्सिंग रोबोट्स' का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। ऐसे में, योगी सरकार इस जापानी तकनीक को उत्तर प्रदेश के चिकित्सा ढांचे में एकीकृत करने के लिए एक बेहद मजबूत और दूरदर्शी नीति पर काम कर रही है। राज्य के सुदृढ़ आईटी नेटवर्क और 'इन्वेस्ट यूपी' पहल के माध्यम से जापानी एआई-ड्रिवेन हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को यूपी के विशाल स्वास्थ्य बाजार में प्रवेश और विस्तार का सीधा अवसर मिल रहा है। जब ये नर्सिंग रोबोट्स और स्वचालित मरीज निगरानी प्रणालियां उत्तर प्रदेश के अस्पतालों का हिस्सा बनेंगी, तो यहां की चिकित्सा प्रणाली में क्रांतिकारी सुधार आएगा। 

विकसित यूपी 2047 की बुलंद नींव
'यूपी-जापान हेल्थकेयर एवं हेल्थकेयर इकॉनमी पार्टनरशिप' केवल एक समझौता नहीं है, बल्कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के विराट संकल्प को समय से पहले सिद्ध करने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। जापान की विश्वस्तरीय सूक्ष्मता, गुणवत्ता और तकनीकी विशेषज्ञता जब उत्तर प्रदेश के अपार स्केल, असीमित युवा प्रतिभा, सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित नीतिगत माहौल से मिलती है, तो वह एक नए स्वर्णिम युग का सूत्रपात करती है। जब यह ऐतिहासिक रोडमैप पूरी तरह साकार होगा, उत्तर प्रदेश न केवल अपनी 25 करोड़ जनता को बढ़ती बीमारियों से मुक्ति दिलाकर उन्हें सस्ता और वैश्विक मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्तापूर्ण इलाज प्रदान करेगा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मेडिकल टूरिज्म और अत्याधुनिक चिकित्सा विनिर्माण का एक ख्याति प्राप्त वैश्विक हब बनकर उभरेगा। निश्चित तौर पर 'लैंड ऑप द राइजिंग सन' के सहयोग से 'लैंड ऑफ सूर्यवंश ' में शुरू हुआ यह नया अध्याय आने वाले समय में केवल यूपी और भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक और मानवीय सहयोग की सबसे सुंदर और अनुकरणीय मिसाल बनेगा।

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक सनी सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शोधार्थी एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन में रिसर्च एसोसिएट हैं।)
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