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भूजल सप्ताह-2026 का समापन: स्वतंत्र देव सिंह ने दिया जल संरक्षण का मंत्र, बोले- यह हर नागरिक का कर्तव्य

Wed, 22 Jul 2026 08:45 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र इवेंट्स डेस्क, अमर उजाला

सार

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और जल कलश पूजन के साथ हुई। इसके बाद हफ्ते भर चली गतिविधियों का संक्षिप्त ब्योरा दिया गया। समारोह में डॉ. श्रेया संगीत संस्थान की तरफ से सांस्कृतिक प्रस्तुति और क्लाइमेट पर चर्चा संस्था की ओर से नुक्कड़ नाटक के जरिए जल पुनर्भरण का संदेश दिया गया।
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यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से भूजल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन बनाने के लिए 16 से 22 जुलाई तक आयोजित भूजल सप्ताह-2026 का राज्य स्तरीय समापन समारोह आज लखनऊ के गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने की। इस वर्ष भूजल सप्ताह का मुख्य संदेश- 'जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प' रहा।
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कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और जल कलश पूजन के साथ हुई। इसके बाद हफ्ते भर चली गतिविधियों का संक्षिप्त ब्योरा दिया गया। समारोह में डॉ. श्रेया संगीत संस्थान की तरफ से सांस्कृतिक प्रस्तुति और क्लाइमेट पर चर्चा संस्था की ओर से नुक्कड़ नाटक के जरिए जल पुनर्भरण का संदेश दिया गया।
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जल संरक्षण सरकारी कार्यक्रम नहीं, साझा जिम्मेदारी: स्वतंत्र देव सिंह
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि भूजल संरक्षण केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि सप्ताह भर चले अभियान के दौरान ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निकायों तक जल चौपाल, रैलियां, प्रभात फेरियां, निबंध, चित्रकला और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों से लाखों लोगों को जोड़ा गया।

मंत्री ने जानकारी दी कि साल 2021 से 2025 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 29 जनपदों में औसत भूजल स्तर में सुधार दर्ज हुआ है और वार्षिक भूजल पुनर्भरण में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने प्रदेशवासियों से 'जहां गिरे, जब गिरे, वर्षा जल तभी संचित करें' के मंत्र को अपनाने का आह्वान किया।

90% घरेलू और 83% सिंचाई जरूरतें भूजल पर निर्भर
जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक राजशेखर ने कहा कि उत्तर प्रदेश की 90% घरेलू, 85% औद्योगिक और 83% सिंचाई की जरूरतें भूजल से ही पूरी होती हैं। ऐसे में बदलते मौसम चक्र को देखते हुए प्रदेश में 'क्लाइमेट रेजिलीनिएंट वॉटर गवर्नेंस' की सख्त जरूरत है।
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